डिब्रूगढ़: मिशन बसुंधरा ४.० के तहत अपर असम-एडिशनल (द्वितीय) जोन कार्य समूह का दिनभर का क्षेत्रीय परामर्श कार्यक्रम डिब्रूगढ़ के जिला आयुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न भूमि संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के साथ डिब्रूगढ़ जिले में हितधारकों से परामर्श किया गया।
उल्लेखनीय है कि असम सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गठित इस कार्य समूह की अध्यक्षता असम के भू-अभिलेख एवं सर्वेक्षण निदेशक कैलाश कार्तिक एन., आईएएस ने की। टीम में प्रबीर कुमार दत्ता, एसीएस, संयुक्त सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग एवं प्राचार्य, एएसएसटीसी; कमल बरुआ, एसीएस, उप सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग एवं एडीएलआर, असम; अदिति गोगोई, एएलआरएस, सहायक डीएलआर, असम; खितुबोन कोंवर, सहायक निदेशक, सर्वेक्षण, असम; हिमांग मोधुकल्या तथा एनआईसी के एक प्रतिनिधि शामिल थे।
कार्यक्रम की शुरुआत डिब्रूगढ़ के जिला आयुक्त बिक्रम कैरी, आईएएस के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद जिला प्रशासन के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें जिला आयुक्त, सह-जिला आयुक्त, अतिरिक्त जिला आयुक्त, अंचल अधिकारी तथा आईएलआरएमएस सलाहकार शामिल हुए।
दिनभर चले परामर्श के दौरान भूमि अभिलेख एवं भूमि प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें मौजादारों, एलआरएस/एएलआरएस तथा गांव प्रधानों के चयन से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा तेल एवं चाय बागान की भूमि के लिए एनओसी की स्थिति, पंजीकरण रहित दस्तावेजों के बढ़ते मामलों तथा उनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।
कार्य समूह ने प्रमुख नागरिकों, पंचायत एवं ग्रामीण निकायों के सदस्यों तथा सीएससी संचालकों के साथ भी संवाद किया और उनसे सुझाव एवं जमीनी स्तर की जानकारी प्राप्त की। गैर-कैडस्ट्रल (एनसी) गांवों के सर्वेक्षण एवं पुनः सर्वेक्षण की स्थिति तथा स्वामित्व योजना (एसवीएएमआईटीवीए) के तहत डैग विभाजन की प्रक्रिया पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
इसके अलावा, परामर्श कार्यक्रम के तहत संयुक्त निरीक्षण/संयुक्त माप (जेआईएम) से जुड़े हितधारकों के साथ भी बैठक आयोजित की गई।
कार्यक्रम के दौरान अदिति गोगोई, एएलआरएस, सहायक निदेशक, भू-अभिलेख, असम द्वारा चाय बागान संबंधी परामर्श तथा सॉफ्टवेयर से जुड़े प्रदर्शन भी किए गए।
यह क्षेत्रीय परामर्श मिशन बसुंधरा ४.० के तहत कार्य समूह द्वारा डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में किए जा रहे व्यापक हितधारक परामर्श अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सामने आ रही भूमि संबंधी समस्याओं का आकलन करना और मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सुझाव एवं जानकारी प्राप्त करना है।