प्रे.स. शिलचर, 2 फरवरी: मानव उत्थान सेवा समिति शिलचर द्वारा डिह बाबा मंदिर प्रांगण जोगिया बस्ती शिलचर में आयोजित दो दिवसीय ३० व ३१ जनवरी ‘संत सद्भावना सम्मेलन’ का शुभारंभ ३० जनवरी को सांय ४ बजे शिलांग (मेघलय) से आये हुए सरसती जी द्वारा गुरु वंदना के साथ हुआ। डिब्रुगढ, गोलाघाट, डेरगांव, उरीअमघाट, शिलचर एंव नूतन बाजार के भजन गायकों द्वारा सुन्दर-सुन्दर मधुर एवं चेतावनी भजन प्रस्तुत किए गए।
शिलापथार, डिब्रुगढ, गोलाघाट,उरीअमघाट , शिलांग (मेघालय) एंव शिलचर से आये हुए पूज्य संत महात्मा गणों ने अपने अपने अमृतमय सत्संग विचार प्रस्तुत किया। 31 जनवरी को सवेरे ९ बजे शिलापथार से पूर्वोत्तर क्षेत्र के उप प्रभारी पूज्य महात्मा अखिलानंद जी के कर कमलो द्वारा हंस नाम, मनव धर्म का ध्वजारोहण किया गया। मानव सेवादल के अधिकारीगण एंव स्वयंसेवक गण द्वारा सलामी दी गई। सबेरे ९.३० बजे पूजा होम यज्ञ के पश्चात १० बजे से शोभा यात्रा निकाली गई दोपहर १ बजे तक । ३ बजे से सत्संग कार्यक्रम का शुभारंभ डिब्रुगढ से आये हुए पूज्य महात्मा नेहा बाई के गुरु वंदना से हुआ।
गोलाघाट से पूज्य महात्मा श्रुति बाई जी, उरीअमघाट से पूज्य महात्मा वर्णिका बाई जी, शिलांग (मेघालय) से पूज्य महात्मा यशोधरा बाई जी एंव शिलचर से पूज्य महात्मा हिमानी बाई जी ने अपने अपने देश भक्ति, समाज कल्याणकारी एवं आध्यात्म से जुड़ी अमृतमय सत्संग विचार रखे।
हरिद्वार सहित अनेक तीर्थों का भ्रमण करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र के उप प्रभारी पूज्य महात्मा अखिलानंद जी ने कहा कि परम पूज्य सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महराज का एक ही नारा जागे भारत देश हमारा।जागे हैं जगायेंगे आत्म ज्ञान फैलायेंगे।
विश्व में शांति कैसे होगी केवल आत्म ज्ञान से। आत्म ज्ञान कहां मिलेगा सद् गुरु के दरबार में। हमारा भारत कैसा हो राम राज्य जैसा हो। इस लिए हमें अपने बच्चों में अच्छा संस्कार डालना चाहिए । हमें सच्चे सद्गुरु की तलाश कर आत्म ज्ञान प्राप्त कर आत्मा का कल्याण करना चाहिए।
छोटे-छोटे बच्चों द्वारा रामायण पर अधारित ज्ञान वर्धक लघु नाट्य एंव नृत्य प्रस्तुत किए गए। मानव सेवादल के सदस्यों द्वारा निस्वार्थ भाव से सहरानीय सेवा कार्य किया गया ।
डेरगांव से जिला प्रमुख दिनेश कुमार ,उप प्रमुख नरेन कुर्मी, गोला घाट से संयोजक सुभाष पानिका , प्रशिक्षक संजय पाईक, जिला सचिव पल्लव हजारिका, उरीअमघाट से जिला सचिव संतोष लिंबू, स्यंम सेवक गोलाघाट एंव डेरगांव से २८ और उरीअमघाट से २ सदस्यों ने भाग लिया एंव सहरानीय कार्य किया।