शिलचर 05 जूलाई: महर्षि विद्या मंदिर शिलचर द्वारा आयोजित “महर्षि चेतना पर आधारित शिक्षा एवं इन -हाउस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का 4 जूलाई को समापन हुआ ।
यह कार्यशाला दिनांक 25 जून दिन बुधवार प्रातः 9:00 बजे प्रारंभ हुआ था। इस कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय के वैदिक परंपरा अनुसार गुरु पूजन एवं भावतीत ध्यान से हुआ। ध्यान के बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या एवं आमंत्रित विवेकानंद केंद्र विद्यालय के प्रधानाचार्य “श्री बिजन शाह”ने दीप प्रज्वलित किया और और महर्षि जी के चरणों में पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम प्रारंभ हुआ । सर्वप्रथम शांति पाठ विद्यालय के प्रशिक्षकों द्वारा हुआ और महर्षि जी के कोड को पढ़ा गया, जो सभी प्रशिक्षकों पर एक सकारात्मक प्रभाव डाला । हर दिन विद्यालय के प्रशिक्षक के द्वारा स्वागत गीत से सभी प्रशिक्षकों एवं आमंत्रित शिक्षाविदों का स्वागत किया गया। हर दिन कोई एक प्रशिक्षक कार्यशाला के’ रिव्यू ऑफ द डे” का पाठ करते । आमंत्रित श्री विजन शाह का स्वागत करते हुए अपने भाषण में विद्यालय की प्रधानाचार्य ने कहा कि इस कार्यशाला में महर्षि जी की चेतना पर आधारित शिक्षा अर्थात ( एम सी बी ई) और (सी बी पी ई) का उद्देश्य शिक्षा को समृद्ध करना है । इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में चेतना ,आत्मविश्वास और समाज के प्रति दायित्वों का विकास करना है । सर्वप्रथम 7 दिनों तक( एम सी बी ई ) महर्षि कॉन्शसनेस बेइसड एजुकेशन का कार्यशाला और दो दिन (सी बी पी ई ) के लिए निर्धारित किया गया। इस 9 दिन के कार्यशाला में 18 सेशन का प्रशिक्षण दिया गया।।

श्री बिजन शाह ने अपने सेशन में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति” के बारे में बताते हुए शिक्षा के महत्व को समझाएं और मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने के महत्व पर प्रकाश डाले, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थी अपने मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करते हुए अपने कौशल और साक्षमता को प्रदर्शित कर सकेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह बहुत लाभप्रद होगा। तदुपरांत विद्यालय की प्रधानाचार्य ने अपने सेशन में एम सी बी ई पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों के पढ़ाई के साथ-साथ महर्षि जी के 16 सिद्धांतों (16 प्रिंसिपलस ) के साथ संबंध बनाए रखने का पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पद्धति विद्यार्थियों में एकाग्रता रचनात्मक और साक्षमता को बढ़ावा देगी। उन्होंने यह भी कहा कि भावातीत ध्यान से विद्यार्थियों का चंचल मन शांत होगा और वह अपने जिम्मेदारियां को बखूबी समझ सकेंगे। दोपहर के भोजन के बाद डीवीडी के द्वारा शिक्षाविद महर्षि जीके चेतना पर आधारित शिक्षा पर अपने व्याख्यान देते फिर सभी प्रशिक्षकों के साथ ऑनलाइन इंटरेक्शन होता, सभी प्रशिक्षक अपने-अपने सवाल करते और अपने जिज्ञासा को शांत करते। हर दिन कोई ना कोई प्रशिक्षक अपने अपने प्रस्तुतीकरण भी प्रस्तुत करते जिससे प्रशिक्षकों को काफी सारे चीज सीखने को मिलती, साथ ही एम सी बी ई की प्रभाव को भी समझते। फिर शाम को चाय का समय होता सभी लोग चाय का आनंद उठाते, फिर सेशन शुरू होता जो 5:30 अर्थ टी अर्थात श्याम के साढे पांच बजे तक चलता, हर दिन का कार्यशाला का समापन राष्ट्रीय गीत द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का नवां दिन हर दिन की तरह की सारे कार्यक्रम हुए। दोपहर के भजन के बाद 9 दिन के कार्यक्रम पर कुछ प्रशिक्षक अपना-अपना फीडबैक अर्थात अपनी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्य की इस 9 दिन के कार्यशाला को इतने सुंदर स्वस्थ रूप से संचालित करने के लिए धन्यवाद दिए और उनकी प्रशंसा में कहा कि यह नौ दिनों का कार्यशाला प्रधानाचार्या ही कर सकती हैं, उन्ही में यह साक्षमता है। इसी कारण 9 दोनों का यह कार्यशाला पूरी तरह से प्रशंसनीय रहा। प्रधानाचार्य ने भी अपने भाषण में विद्यालय के सभी कर्मचारी का प्रशंसा एवं सहयोग करने के लिए धन्यवाद देते हुए कुछ कर्मचारियों को उत्तरीय एवं पुस्तक से सम्मानित भी किया और अपनी कृतज्ञता जताई।
इसके बाद करीमगंज अर्थात श्री भूमि से आए सभी प्रशिक्षकों को उत्तरीय एवं पुस्तक से सम्मानित की। सभी प्रशिक्षकों को सर्टिफिकेट दिया गया। इसके बाद गीत संगीत का माहौल भी उपस्थित हुआ अंत में कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत द्वारा किया गया।