पूर्वोत्तर में भाषाई एकात्म के सूत्र की पड़ताल करना आज की जरूरत- प्रो विनोद कुमार मिश्र
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ,नई दिल्ली के भारतीय भाषा मंच,उत्तर -पूर्व द्वारा दिनाँक 23/07/2026 को मणिपुर विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा मंच, मणिपुर इकाई स्थापना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में अध्यक्ष के रूप में प्रो एस इमोबा सिंह, पूर्व मानविकी संकाय प्रमुख एवं भारतीय भाषा समिति, मणिपुर विश्वविद्यालय के समन्वय अधिकारी की उपस्थिति रही।मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं हिंदी विभाग त्रिपुरा विश्वविद्यालय के आचार्य विनोद कुमार मिश्र मौजूद रहे साथ ही विशिष्ट अतिथि की भूमिका में श्री ब्रम्हाचारीमयुम बिल्की शर्मा, जिला कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, इम्फाल, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, उत्तर -पूर्व के प्रचार प्रसार संयोजक एवं मेघालय प्रान्त संयोजक डॉ आलोक सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय मंगलाचरण से हुई।इसके बाद इस कार्यक्रम की संयोजक तथा मणिपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की आचार्य कंचन शर्मा ने सभी का स्वागत किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो एस इमोबा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यदि आप अपनी भाषा से प्यार करते हैं तो आप अपने समाज और लोगों से प्यार करते हैं। इसके साथ उन्होंने मातृभाषाओं में उपलब्ध साहित्य को बचाएं रखने का आवाहन किया। इसके बाद प्रो विनोद कुमार मिश्र ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत की प्रत्येक मातृभाषा में निहित भारतीयता की तलाश करना ही हमारा उद्देश्य है।पूर्वोत्तर में भाषाई एकात्म के सूत्र की पड़ताल करना आज की जरूरत है।भारतीय भाषा मंच ने भारत की सभी भाषाओं की ताकत को तलाशने की लगातार कोशिश की है। आभासी माध्यम से जुड़े भारतीय भाषा मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजेश्वर कुमार ने कहा कि भाषाओं का विभाजन यह भाषाओं के लिए ठीक नहीं बल्कि उनका भारतीयकरण होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भाषा मंच भारतीय भाषाओं के संवर्धन के लिए कार्य करती है सभी भाषाओं को महत्व देती है। ततपश्चात श्री ब्रम्हाचारीमयुम बिल्की शर्मा ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा के प्रति रुचि को विकसित करना चाहिए क्योंकि हमारी मातृभाषा में ही हमारी संस्कृति, कला दर्शन प्रमुखता पाते हैं। इसके उपरांत डॉ आलोक सिंह ने पूर्वोत्तर में भारतीय भाषा मंच के कार्यों का उल्लेख किया। इस कार्यक्रम में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो अखिलेश शंखधर, साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त श्री आर के. भुवनसाना सिंह, वानिकी संकाय के सहायक आचार्य डॉ विवेक वैष्णव आदि भाषाविद, विद्यार्थी, शोधार्थी उपस्थित थे। इसके बाद भारतीय भाषा मंच इकाई गठन को लेकर एक बैठक की गई जिसमें मंच के विस्तार के बारे में चर्चा हुई।