भाषा शहीदों के अधिकारों की रक्षा हर कीमत पर करने का संकल्प

शिलचर, 21 जुलाई। असम में बांग्लाभाषी लोगों के भाषाई अधिकार लगातार सीमित किए जा रहे हैं और विभिन्न कूटनीतिक तरीकों से बंगाली समाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। भाषा शहीदों के बलिदान से प्राप्त अधिकारों की हर कीमत पर रक्षा करनी होगी—यही संकल्प सभी को लेना होगा।

अमर 21 जुलाई भाषा शहीद दिवस एवं भाषा आंदोलन के शहीदों के आत्मबलिदान की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर बराक नागरिक संसद की ओर से शिलचर प्रेस क्लब में आयोजित श्रद्धांजलि एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह बात कही।

कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “क्या असम में बांग्ला भाषा का अधिकार लगातार सीमित होता जा रहा है?”

इस अवसर पर नागरिक संसद के प्रधान महासचिव शंकर दे, 21 जुलाई भाषा आंदोलन के नेता तथा तत्कालीन ‘बराक घाटी संघर्ष समन्वय समिति’ के मुख्य संयोजक मिहिरलाल राय, आंदोलन से जुड़े शरीफ-उज-जमान लस्कर, आकसा के सलाहकार रूपम नंदीपुरकायस्थ, कवि-संवाददाता स्मृति पाल नाथ, कवि एवं समाजसेवी शतदल आचार्य, पत्रकार अभिजीत भट्टाचार्य, समाजसेवी राजदीप दाम, विष्णुपुरिया साहित्य सभा के केंद्रीय अध्यक्ष किरण रास तथा समाजसेवी बहार अहमद चौधरी सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने कहा कि भाषा शहीदों का बलिदान केवल स्मरण करने का विषय नहीं, बल्कि उनके बलिदान से प्राप्त भाषाई अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने की प्रेरणा है।

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