गांधीनगर: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत जहाज स्वामित्व, पट्टे और समुद्री वित्त के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात का गिफ्ट सिटी भारत की समुद्री वित्त संबंधी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सोनोवाल ने आज गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी क्लब में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘इंडिया शिप लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट’ को संबोधित किया। कार्यक्रम में नीति निर्माता, जहाज मालिक, पट्टादाता, चार्टरकर्ता, वित्तीय संस्थान तथा समुद्री क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारक शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की प्राचीन समुद्री विरासत का उल्लेख करते हुए इसे सिंधु घाटी सभ्यता और गुजरात के प्राचीन लोथल बंदरगाह से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत को जहाज पट्टे, स्वामित्व, वित्तपोषण, बीमा, ब्रोकरेज और अन्य सहायक सेवाओं से युक्त व्यापक समुद्री मूल्य शृंखला का वैश्विक केंद्र बनाने में गिफ्ट सिटी महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रही है।
सोनोवाल ने बताया कि देश में जहाज पट्टे के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्तमान में ३८ जहाज पट्टादाता पंजीकृत हैं और वे सामूहिक रूप से ४३ जहाजों को पट्टे पर दे रहे हैं। इनकी कुल पट्टे क्षमता २९.९ लाख डेडवेट टन (डीडब्ल्यूटी) से अधिक हो गई है। इनमें से २४ जहाज भारतीय ध्वज के तहत संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आईएफएससी में ४१ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इन बैंकों ने जहाज पट्टे से जुड़ी संस्थाओं को करीब ६०.१ मिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्तपोषण उपलब्ध कराया है। गिफ्ट सिटी में डीजीएमए के पहले क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना से जहाज मालिकों और संचालकों के लिए यह पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय समुद्री क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने वाले विभिन्न सुधारों का भी उल्लेख किया। इनमें तटीय पोत परिवहन अधिनियम, २०२५ के तहत चार्टर पर संचालित विदेशी जहाजों के लिए लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं से छूट तथा गिफ्ट आईएफएससी आधारित शिपिंग कंपनियों को विदेशी ध्वज वाले जहाजों के स्वामित्व की अनुमति शामिल है।
सोनोवाल ने कहा कि इन सुधारों से भारत अपने बेड़े को केवल भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि देश के स्वामित्व और नियंत्रण वाले कुल टन भार के आधार पर भी देख सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गिफ्ट सिटी अब भारत के अगले चरण के समुद्री विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच बनने की स्थिति में है।
उन्होंने समुद्री क्षेत्र के लिए सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धताओं का भी उल्लेख किया। इसके तहत २५,००० करोड़ रुपये के समुद्री विकास कोष से वर्ष २०३० तक १.५ लाख करोड़ रुपये तक के निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं, जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना एसबीएफएएस २.० का संशोधित परिव्यय २४,७३६ करोड़ रुपये किया गया है, जिसे वर्ष २०३६ तक बढ़ाया गया है।
सोनोवाल ने कहा कि मैरीटाइम इंडिया विजन २०३० और मैरीटाइम अमृत काल विजन २०४७ भारत के समुद्री क्षेत्र के विस्तार के लिए प्रमुख रोडमैप हैं। इनका उद्देश्य भारतीय बेड़े का विस्तार, बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाना, तटीय पोत परिवहन को मजबूत करना और भारत को दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा जहाज पुनर्चक्रण देश बनकर उभरा है। वैश्विक टन भार में भारत की हिस्सेदारी वर्ष २०२४ में ३०.१ प्रतिशत से बढ़कर वर्ष २०२५ में ३५.४ प्रतिशत हो गई है।
कार्यक्रम में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, आईएफएससीए के अध्यक्ष के. राजारामन तथा गुजरात सरकार के पत्तन एवं परिवहन विभाग के प्रधान सचिव हरीत शुक्ला भी उपस्थित रहे।