गुरुग्राम: केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुग्राम स्थित द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के ग्वाल पहाड़ी परिसर का दौरा कर हरित शिपिंग से जुड़ी विभिन्न पहलों की समीक्षा की। इस दौरान प्रस्तावित ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और वैकल्पिक ईंधन के लिए बंदरगाहों की तैयारियों पर विशेष चर्चा हुई।
सोनोवाल ने कहा कि वर्ष २०२६ में ग्रीन शिपिंग अब विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक दिशा बन चुकी है और भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय बंदरगाहों को भविष्य के हरित ईंधनों के लिए तैयार करना आवश्यक है और इस दिशा में टेरी जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
बैठक में रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट ने कम और शून्य-उत्सर्जन वाले शिपिंग कॉरिडोर विकसित करने की अपनी पहल प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन और नई तकनीकों को समुद्री परिवहन व्यवस्था में तेजी से अपनाना है।
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी ने ग्रीन फ्यूल बंकरिंग हब विकसित करने की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दी। वहीं, कामराजार पोर्ट लिमिटेड ने बताया कि उसके कोयला टर्मिनलों में शोर पावर सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे बंदरगाह पर खड़े जहाज अपने इंजन चलाने के बजाय जमीन से बिजली ले सकते हैं और उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शोर पावर से लेकर ग्रीन फ्यूल बंकरिंग हब तक की पहल भारत के समुद्री क्षेत्र को अधिक स्वच्छ, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने इसे सरकार, बंदरगाहों, शोध संस्थानों और उद्योग के साझा प्रयास का परिणाम बताया।
कार्यक्रम के अंत में मंत्री ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न बंदरगाहों और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यह दौरा भारत के बंदरगाहों पर ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर और हरित ईंधन की बंकरिंग क्षमता विकसित करने के व्यापक प्रयासों के बीच हुआ।