कांग्रेस मुक्त भारत का सपना दिखाकर केंद्र की सत्ता हासिल करनेवाले नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद जिस तरह से बीजेपी का कांग्रेसीकरण किया है, वह अब संघ-बीजेपी के मूल समर्थकों की नाराजगी बढ़ा रहा है?
इस संबंध में कई बार लिखा गया कि…. मोदी टीम ने संघ से आए अनेक वरिष्ठ नेताओं को सियासी संन्यास आश्रम में भेज दिया, बीजेपी के कई पुराने स्टार प्रचारकों को पार्टी से बाहर कर दिया, तो कई अन्य दलों से आए भ्रष्ट नेताओं को सत्ता में सम्मानजनक स्थान दे दिया, यही नहीं…. गौहत्या विरोधी कानून, चीनी सामान विरोधी स्वदेशी आंदोलन आदि को भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया है! जाहिर है, इससे संघ और बीजेपी के मूल समर्थक खुश नहीं हैं और इनकी नाराजगी अगले लोकसभा चुनाव 2024 में पीएम मोदी को भारी पड़ेगी? दैनिक भास्कर की खबर है कि…. आरएसएस के पूर्व प्रचारक अभय जैन,मनीष
काले और विशाल बिंदल ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई है, जिसका 10 सितंबर 2023 को भोपाल में पहला कार्यकर्ता सम्मेलन हो रहा है, जिसमें जनहित पार्टी के गठन की औपचारिक घोषणा के बाद चुनाव आयोग में पंजीयन की औपचारिकता पूरी होगी. यदि चुनाव से पहले पार्टी का पंजीयन नहीं हुआ तो पार्टी के नेता निर्दलीय
चुनाव लड़ेंगे. खबर के अनुसार…. इन पूर्व प्रचारकों ने व्यापमं घोटाले को लेकर भी आंदोलन किया था, पार्टी के थिंक टैंक अभय जैन 1986 से 2007 तक संघ के
प्रचारक रहे, 2007 में संघ से मुक्त होने के बाद से लगातार वे सामाजिक आंदोलन कर रहे हैं, जैन ने मैनिट भोपाल से इंजीनियरिंग करने के पश्चात संघ प्रचारक के रूप में इंदौर में लंबे समय तक काम किया, इंदौर विभाग प्रचारक के बाद वे मध्य भारत प्रांत के सेवा प्रमुख, बौद्धिक प्रमुख आदि रहे. सियासी सयानों का मानना है कि…. मोदी टीम ने बेहद सियासी चतुराई से संघ के सिद्धांतों को एक तरफ कर दिया है और बीजेपी का कांग्रेसीकरण करके मूल भाजपाइयों को लगातार कमजोर किया है, लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि 2024 में संघ और बीजेपी के मूल समर्थक अपना वैचारिक-सैद्धांतिक अस्तित्व बचा पाते हैं या नहीं?
इस संबंध में कई बार लिखा गया कि…. मोदी टीम ने संघ से आए अनेक वरिष्ठ नेताओं को सियासी संन्यास आश्रम में भेज दिया, बीजेपी के कई पुराने स्टार प्रचारकों को पार्टी से बाहर कर दिया, तो कई अन्य दलों से आए भ्रष्ट नेताओं को सत्ता में सम्मानजनक स्थान दे दिया, यही नहीं…. गौहत्या विरोधी कानून, चीनी सामान विरोधी स्वदेशी आंदोलन आदि को भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया है! जाहिर है, इससे संघ और बीजेपी के मूल समर्थक खुश नहीं हैं और इनकी नाराजगी अगले लोकसभा चुनाव 2024 में पीएम मोदी को भारी पड़ेगी? दैनिक भास्कर की खबर है कि…. आरएसएस के पूर्व प्रचारक अभय जैन,मनीष
काले और विशाल बिंदल ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई है, जिसका 10 सितंबर 2023 को भोपाल में पहला कार्यकर्ता सम्मेलन हो रहा है, जिसमें जनहित पार्टी के गठन की औपचारिक घोषणा के बाद चुनाव आयोग में पंजीयन की औपचारिकता पूरी होगी. यदि चुनाव से पहले पार्टी का पंजीयन नहीं हुआ तो पार्टी के नेता निर्दलीय
चुनाव लड़ेंगे. खबर के अनुसार…. इन पूर्व प्रचारकों ने व्यापमं घोटाले को लेकर भी आंदोलन किया था, पार्टी के थिंक टैंक अभय जैन 1986 से 2007 तक संघ के
प्रचारक रहे, 2007 में संघ से मुक्त होने के बाद से लगातार वे सामाजिक आंदोलन कर रहे हैं, जैन ने मैनिट भोपाल से इंजीनियरिंग करने के पश्चात संघ प्रचारक के रूप में इंदौर में लंबे समय तक काम किया, इंदौर विभाग प्रचारक के बाद वे मध्य भारत प्रांत के सेवा प्रमुख, बौद्धिक प्रमुख आदि रहे. सियासी सयानों का मानना है कि…. मोदी टीम ने बेहद सियासी चतुराई से संघ के सिद्धांतों को एक तरफ कर दिया है और बीजेपी का कांग्रेसीकरण करके मूल भाजपाइयों को लगातार कमजोर किया है, लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि 2024 में संघ और बीजेपी के मूल समर्थक अपना वैचारिक-सैद्धांतिक अस्तित्व बचा पाते हैं या नहीं?