बिहार में एनडीए के दो दलित बड़े नेता एवं मंत्री दलित आरक्षण में सब-कैटेगराइजेशन के मुद्दे पर आपस में ही भिड़े 

अनिल मिश्र पटना 

 बिहार प्रदेश की राजनीति एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) गठबंधन के भीतर ही अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण में वर्गीकरण और क्रीमी लेयर के मुद्दे पर भारी घमासान मच गई है। बिहार प्रदेश के बड़े दलित एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय सुक्ष्म,लघु उद्योग मंत्री जीतन राम मांझी एवं उनके पुत्र और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे की मांग की है, जिसपर संतोष सुमन ने पलटवार किया। गया के सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने बिहार में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण और ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के दो प्रमुख सहयोगी दल आमने-सामने आ गए हैं।लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन से इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबा पोस्टर कर काउंटर अटैक किया है। इस बीच संतोष  मांझी ने दो टूक कहा है कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं।लेकिन उनके साथ चिराग पासवान को भी इस्तीफा देना होगा। क्योंकि वह राजनीतिक रूप से तीसरी पीढ़ी में आते हैं। उन्होंने  इस पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हमारे छोटे भाई यानी पशुपति नाथ पारस के पास बड़ी पार्टी है।इस बीच उन्होंने कहा कि चिराग पासवान के पास हम से संख्याबल भी अधिक है इसलिए उन्हें ही इस्तीफा देकर इसकी शुरूआत करनी चाहिए। बिहार के मंत्री संतोष सुमन ने साफ कहा कि कभी उन्होंने क्रीमी लेयर के आधार पर किसी को आरक्षण से बाहर करने की बात ही नहीं की. कोटे में कोटा और क्रीमी लेयर दोनों पूरब और पश्चिम जैसे हैं।इस बीच संतोष कुमार मांझी ने कहा कि जहां तक इस्तीफे का सवाल है, हम तैयार हैं।मेरे छोटे भाई की पार्टी बड़ी है, उनके पास हमसे अधिक संख्याबल है और राजनीतिक रूप से तीसरी पीढ़ी भी है, तो शुरुआत वही करें वे इस्तीफा देकर सामने आएं, हम भी उनके साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं।लेकिन मेरे छोटे भाई, पहले मेरी बात को ठीक से समझिए। मैंने अपने ट्वीट और बयान में कहीं भी क्रीमी लेयर की बात नहीं की है।मैंने न एससी/एसटी आरक्षण समाप्त करने की बात कही है और न ही क्रीमी लेयर के आधार पर किसी को आरक्षण से बाहर करने की बात कही है।कोटे में कोटा और क्रीमी लेयर—दोनों पूरब और पश्चिम हैं. दोनों को एक साथ मिलाकर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है।इस बीच बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि मुसहर, भुइयां, हलखोर, नट और डोम जैसे कई समुदाय आज भी सामाजिक, पढ़ाई और आर्थिक मामले में काफी पीछे हैं। उनका दावा है कि इन जातियों के लोगों को अपने ही दलित वर्ग के अंदर भेदभाव और छुआछूत का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि वह दलित आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि दलित वर्ग में जो जातियां अभी भी पीछे हैं, उनके लिए आरक्षण में कुछ हिस्सा तय किया जाए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर डर या भ्रम फैलाने के बजाय सही जानकारी और बातचीत के साथ बात होनी चाहिए। संतोष सुमन ने चिराग पासवान को यह भी कहा कि एससी -एसटी समाज के मुद्दे पर किसी से सामंती सोच के साथ बात नहीं करनी चाहिए।  सिर्फ राजनीतिक मंचों और बयानों तक बात सीमित रखने के बजाय गरीबों की झोपड़ियों और बस्तियों में जाकर उनकी हालत देखनी चाहिए।उन्होंने कहा कि वहां रहने वाले लोगों तक सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार के मौके और आरक्षण का फायदा आज भी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। आपको बताते चलें कि इससे पहले चिराग पासवान ने  आज ही शनिवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर मांझी और संतोष सुमन को घेरा था।चिराग ने कहा था कि आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा की बात करने वाले जीतन राम मांझी और संतोष सुमन दोनों को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।इस बीच हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी चिराग पासवान पर पलटवार किया। मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी न तो आरक्षण खत्म करने की बात कर रही है और न ही उसे हटाने की। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान उनके बेटे संतोष सुमन की बात को समझ नहीं रहे हैं. मांझी ने कहा कि अगर चिराग पासवान इस्तीफा मांग रहे हैं तो उन्हें पहले खुद इस्तीफा देना चाहिए।

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