अनिल मिश्र /बोधगया
भगवान महात्मा बुद्ध की ज्ञान भूमि बोधगया से एक बेहद गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) बोधगया ने अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। संस्थान के चार प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर द्वारा जारी विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में अपनी जगह पक्की की है। डॉ. अविरल कुमार तिवारी, डॉ. रोहित अग्रवाल, डॉ. रघुनाथन कृष्ण कुमार और डॉ. सुनील तिवारी की इस वैश्विक उपलब्धि ने न केवल आईआईएम बोधगया के शोध कौशल को विश्व पटल पर स्थापित किया है, बल्कि पूरे बिहार राज्य को एक असीम गौरव की अनुभूति कराई है। ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में बिहार की यह धमक बताती है कि यहां के शैक्षणिक संस्थानों में विश्वस्तरीय शोध और नवाचार का बेहतरीन माहौल पनप रहा है। दरअसल विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की यह सूची अकादमिक दुनिया में सबसे प्रामाणिक और प्रतिष्ठित मानी जाती है। स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर वर्ल्ड्स टॉप साइंटिस्ट्स डेटाबेस उन चुनिंदा शोधकर्ताओं को ही मान्यता देता है, जिनके अध्ययन और अकादमिक कार्यों का समाज, विज्ञान और वैश्विक नीतियों पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस अत्यंत जटिल और पारदर्शी सूची को स्कोपस के व्यापक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाता है। किसी भी वैज्ञानिक को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए शोध-पत्रों के उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखकों के साथ किए गए कार्य के प्रभाव और समग्र अकादमिक योगदान जैसे बेहद कड़े मानकों की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है। यह मूल्यांकन शोधकर्ताओं के पूरे अकादमिक करियर के साथ-साथ किसी एक विशिष्ट वर्ष में उनके कार्य के प्रभाव को अलग-अलग वैज्ञानिक मापदंडों पर तौलता है।इस तरह बिहार सहित पूरे देश भर के अकादमिक जगत और शोध क्षेत्र में लगातार उपलब्धि हासिल कर रहा है।