प्रधानमंत्री से छात्र आंदोलनों पर संवाद और परीक्षा सुधार की मांग

विशेष प्रतिनिधि नई दिल्ली, 24 जूलाई। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्र आंदोलनों पर बल प्रयोग के बजाय संवाद स्थापित करने तथा पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।

अपने पत्र में मलिक ने कहा कि देश का युवा आंदोलन करने के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य की चिंता के कारण सड़कों पर उतरने को मजबूर होता है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों की मेहनत और परिवारों की आर्थिक कठिनाइयों के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के कारण उनके सपने टूट जाते हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवालों ने युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास कमजोर किया है।

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका उत्तर संवाद के माध्यम से दिया जाना चाहिए, न कि बल प्रयोग से। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती असहमति को सुनने और उसका समाधान करने में है।

पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक युवाओं का विश्वास बहाल नहीं हो सकेगा। उन्होंने विपक्ष से भी छात्रों के मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ लेने के बजाय व्यावहारिक सुधारों के लिए सरकार पर रचनात्मक दबाव बनाने और सहयोग करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री से उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्ट नीति की मांग की है। इनमें पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी व्यवस्था, पेपर लीक में शामिल संगठित गिरोहों और उनके संरक्षणकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई, परीक्षा रद्द होने से छात्रों के समय, धन और मानसिक क्षति की भरपाई के लिए नीति तथा भर्ती एवं परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने की समयबद्ध योजना शामिल है।

धर्मेंद्र मलिक ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से छात्र प्रतिनिधियों के साथ तत्काल संवाद स्थापित करने, पेपर लीक के दोषियों के विरुद्ध बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा ऐसी शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया है, जिस पर देश का प्रत्येक छात्र विश्वास कर सके।

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