पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी का 11वां स्थापना दिवस भव्य आयोजन के साथ संपन्न
शिलचर, 10 मई : पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी का 11वां स्थापना दिवस रविवार को शिलचर के एक प्रतिष्ठित होटल में गरिमामय एवं भव्य वातावरण में आयोजित किया गया। साहित्य, कला और समाजसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी की अध्यक्षा रीता सिंह ‘सर्जना’ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में मूलचंद वैद तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सुभदा पांडेय और कांता राय उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना एवं वंदेमातरम् की प्रस्तुति के साथ हुआ। स्वागत भाषण सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’ ने प्रस्तुत किया, जबकि अकादमी की गतिविधियों एवं उद्देश्यों पर मधु पारख ने विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया, जिसने उपस्थित साहित्य एवं कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। सचिव प्रतिवेदन कल्पना देवी आत्रेय ने प्रस्तुत किया।
समारोह के दौरान अकादमी की साहित्यिक पत्रिका का विधिवत विमोचन किया गया। पत्रिका की संपादक रीता सिंह ‘सर्जना’ ने अपने संबोधन में हिंदी साहित्य के संवर्धन एवं रचनात्मक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
दोपहर 12 बजे आयोजित सम्मान एवं उपाधि अलंकरण समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों, कलाकारों एवं समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में कांता राय, बिर्ख खड़का डुवर्सेलि, हरि लुईटल, योगेश दुबे, समीन सेन डेका, बिनय कुमार बुद्ध, अभिजीत गोतानी, मेघा दास, मूलचंद वैद, सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’ तथा मधु पारख शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन मधु पारख ने किया।
दूसरे सत्र में ‘लघुकथा’ विषय पर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा आयोजित की गई। इस सत्र की मुख्य अतिथि भोपाल स्थित लघुकथा शोध केंद्र की निदेशक कांता राय रहीं। परिचर्चा का संचालन रीता सिंह ‘सर्जना’ ने किया, जिसमें साहित्यकारों ने लघुकथा की वर्तमान प्रासंगिकता और साहित्यिक भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
इसके पश्चात बहुभाषी कवि सम्मेलन एवं भव्य काव्य महोत्सव का आयोजन हुआ। शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक चले इस सत्र में विभिन्न भाषाओं के कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’ ने किया।
संपूर्ण कार्यक्रम साहित्यिक उत्साह, सांस्कृतिक गरिमा और रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।