पुलिस के नाक के नीचे फल-फूल रहा अवैध शराब का काला कारोबार

NIT शिलचर के आसपास गांवों में सामाजिक संकट गहराया — युवाओं की मौत, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, महिलाओं पर हमले से दहशत
शिव कुमार | शिलचर | 3 मई
शिलचर के निकट स्थित बारिक नगर, भोराखाई, शिलकुड़ी और फकीरटीला क्षेत्रों में अवैध एवं कच्ची शराब का कारोबार खुलेआम जारी रहने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले तीन से चार वर्षों से यह गैरकानूनी धंधा पुलिस और प्रशासन की आंखों के सामने फल-फूल रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का सामाजिक वातावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, जहरीली और अवैध शराब के सेवन से अब तक चार से पांच युवकों की मौत हो चुकी है। कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं, जिसके कारण घरों में आर्थिक संकट गहरा गया है। कई महिलाएं विधवा होकर परिवार चलाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जबकि छोटे-छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा गंभीर असर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शराब की लत और परिवारों की आर्थिक बदहाली का सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। अनेक परिवारों में आय का स्रोत खत्म हो जाने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। कुछ बच्चे स्कूल छोड़ने तक को मजबूर हो गए हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता दिखाई दे रहा है।
शिकायतों के बावजूद नहीं रुका कारोबार
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार पुलिस प्रशासन को इस अवैध कारोबार की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि पुलिस समय-समय पर पहुंचकर चेतावनी देकर लौट जाती है, परंतु कुछ ही दिनों बाद फिर से शराब की बिक्री शुरू हो जाती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, अवैध कारोबार में शामिल लोग खुलेआम यह कहते हैं कि “पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती”, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है।
महिलाओं के साथ मारपीट से भड़का आक्रोश
हाल ही में सामने आई एक घटना ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया। बताया गया कि एक बीमार व्यक्ति दवा लेने के बहाने घर से निकला, लेकिन बाद में शराब पीने पहुंच गया। जब उसकी पत्नी और बहू उसे वापस लाने गईं, तो कथित शराब कारोबारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और झाड़ू से मारपीट की।
इस घटना के बाद गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है कि विरोध के दौरान शराब कारोबार से जुड़े लोगों ने लाठी-डंडे लेकर महिलाओं को धमकाया और डराने की कोशिश की।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज
अवैध शराब के खिलाफ चल रहे विरोध में गांव की महिलाओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ता गीता पांडे (शर्मा) भी शामिल रहीं। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में चल रहे इस अवैध कारोबार को तत्काल बंद कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
गंभीर सामाजिक संकट की ओर बढ़ता क्षेत्र
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। युवाओं की लगातार हो रही मौतें, बच्चों का बिगड़ता भविष्य और महिलाओं की असुरक्षा अब पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि अवैध शराब कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि गांवों को बर्बादी से बचाया जा सके।