नहीं चाहती हूं मैं बाल दिवस।

  नहीं चाहती हूं मैं बाल दिवस
        जब उन्हें समझ में नहीं आता,
               हम बच्चे है
बाल दिवस नही ,
        पहले उन्हें समझा दो,
हमारे आबरू न उतरना को।
    किया चाहते है हमसे ,
क्यों हमे ज़िन्दानी सा,
   रखना चाहते है।
क्यों मनाते हो बाल दिवस,
जब कोई नहीं समझते ,
          हम बच्चे है।
कितने नाबालिग का जान लिया।
कितने मां का गोद रिक्त किया ।
मां के अश्कों से दरिया बह गया।
पर कोई नहीं समझते हम बच्चे है।
 हमारा भी जी चाहती है,
                दुनिया देखने का।
क्यों हमारे आजादी छीनाना चाहते है?
हमें कफ़स  में बंद न करो।
      नहीं चाहती हूं मैं बाल दिवस।
पहले उन्हें समझा दो,
    हमारे किशोर काल न छीनने को।
          उन्हें समझा दो बस
                 हम बच्चे है।
          उन्हें समझा दो
           उन्हें समझा दो ……..
              नाम –हाजिरा बेगम चौधरी।
         कक्षा– ग्यारहवीं कला।
 जवाहर नवोदय विद्यालय कछार।

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