नवनामित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग का धुबरी ए.एम.को. रोड विरासत संरक्षण समिति ने किया विरोध

सलीम शेख, 

धुबरी, 14 जुलाई: ब्रिटिश काल के ए.एम.को. रोड का नाम बदलकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड किए जाने का धुबरी ए.एम.को. रोड विरासत संरक्षण समिति ने विरोध किया है। समिति का कहना है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का असम के प्रति कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं रहा है, इसलिए सड़क का पुराना नाम ही बरकरार रखा जाना चाहिए।

समिति ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाएंगे, लेकिन नए नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। इसी मुद्दे पर धुबरी के पुराने ए.एम.को. रोड पर एक आम सभा आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय लोग और समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समाजसेवी सिराजुद्दीन अहमद की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में स्थानीय लोगों की राय ली गई और कई प्रस्ताव पारित किए गए। साथ ही, आगे की गतिविधियों के संचालन के लिए धुबरी ए.एम.को. रोड विरासत संरक्षण समिति के नाम से 31 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।

सभा में समाजसेवी सिमुल सरकार, अजाहर हुसैन, सिराजुद्दीन अहमद, मोजामेल हक, हबीबुर रहमान, रामेश्वर सेन सहित क्षेत्र के अनेक लोग उपस्थित थे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि ए.एम.को. रोड का नाम असम और धुबरी के इतिहास तथा विरासत से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस ऐतिहासिक पहचान को मिटाने नहीं दिया जाएगा।

वक्ताओं का यह भी कहना था कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की असम में कोई भूमिका नहीं रही, इसलिए उनके नाम पर सड़क का नामकरण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क का नाम प्रतिमा पांडे बरुआ, जुबिन गर्ग, शरत चंद्र सिन्हा या डॉ. पन्नालाल ओसवाल के नाम पर रखा जाता, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर सड़क का नामकरण उन्हें स्वीकार नहीं है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले असम सरकार के मंत्री अशोक सिंघल धुबरी पहुंचे थे। इसके बाद वर्ष 1925 में ऐतिहासिक असम मैच कंपनी (ए.एम.को.) के नाम पर रखे गए इस सड़क के नाम को बदलकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड कर दिया गया। इस निर्णय का स्थानीय लोगों तथा धुबरी ए.एम.को. रोड विरासत संरक्षण समिति ने विरोध किया है।

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