नराकास की बैठकों में कार्यालय प्रमुखों की उपस्थिति अनिवार्य, राजभाषा विभाग ने जारी किया निर्देश

गुवाहाटी, 3 नवंबर: पूर्वोत्तर क्षेत्र में केंद्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय (पूर्वोत्तर), गुवाहाटी की ओर से 2 नवंबर 2026 को जारी पत्र में नराकास (नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति-TOLIC) की बैठकों में संबंधित कार्यालय प्रमुखों की उपस्थिति अनिवार्य करने पर जोर दिया गया है।

क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय के उप निदेशक (कार्यान्वयन) एवं कार्यालय प्रमुख राजीव कुमार नायक द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि नराकास के गठन का उद्देश्य केंद्र सरकार के कार्यालयों, उपक्रमों एवं बैंकों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना तथा राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराना है। इन बैठकों में कार्यालय अध्यक्षों एवं प्रशासनिक प्रमुखों के साथ राजभाषा संवर्ग के अधिकारियों को भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और बेहतर कार्यप्रणालियों की जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राजभाषा नियम, 1976 के नियम 12 के तहत राजभाषा नीति के कार्यान्वयन एवं समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों के अनुपालन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होती है। इसलिए नराकास की बैठकों में कार्यालय प्रमुख, प्रशासनिक प्रमुख अथवा ऐसे अधिकृत अधिकारी की भागीदारी अनिवार्य है, जो कार्यालय प्रमुख की अनुपस्थिति में औपचारिक रूप से उनका कार्यभार संभालने के लिए अधिकृत हो।

राजभाषा विभाग ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि कई बार नराकास की बैठकों में केवल राजभाषा संवर्ग के अधिकारी अथवा राजभाषा नोडल अधिकारी ही भाग लेते हैं, जो उचित नहीं है। निर्देश में कहा गया है कि राजभाषा अधिकारियों को बैठक में तभी भाग लेना चाहिए, जब वे अपने कार्यालय के अध्यक्ष, प्रशासनिक प्रमुख अथवा अधिकृत प्रतिनिधि के साथ उपस्थित हों।

इसके अलावा, जिन कार्यालयों से निर्धारित प्रारूप में प्रगति रिपोर्ट समय पर प्राप्त नहीं होती है तथा जिन कार्यालयों के प्रमुख नराकास की बैठकों में शामिल नहीं होते हैं, उनकी सूची एवं विवरण क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय (पूर्वोत्तर) को भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि इस मामले को संबंधित कार्यालयों के मुख्यालयों एवं मंत्रालयों के समक्ष भी उठाया जा सके।

पत्र की प्रतिलिपि पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी नराकास अध्यक्षों एवं सदस्य सचिवों को भेजकर संबंधित कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा उनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया है।

इस निर्देश को पूर्वोत्तर के केंद्रीय सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक उपक्रमों में राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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