नई दिल्ली: सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और समुद्री कैडेटों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
इस कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई।
इस अवसर पर सोनोवाल ने भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद देश को एकजुट करने में सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
भारत के लौह पुरुष के योगदान को रेखांकित करते हुए सोनोवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण और ३१ अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत कर प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को उनका उचित सम्मान प्रदान किया है।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देश को एकजुट भारत का उपहार दिया और आज वे प्रत्येक भारतीय की राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न अंग बन चुके हैं।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने युवा समुद्री कैडेटों और अन्य युवाओं के साथ संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि युवाओं में देशभक्ति, राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प भारत की युवा शक्ति की वास्तविक क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने युवा पीढ़ी से सरदार पटेल के एकता और अखंडता के आदर्शों को आत्मसात करते हुए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के साथ एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया।
सोनोवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है और २०४७ तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अब केवल एक परिकल्पना या दृष्टिकोण नहीं रह गया है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। समुद्री क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत के बंदरगाह, जहाजरानी व्यवस्था और आंतरिक जलमार्ग पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिमी तट तक देश के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ रहे हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज के युवा समुद्री कैडेट २०४७ तक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में भविष्य में महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। इस कार्यक्रम में बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार सहित मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।