तिनसुकिया में संतरा खेती के विस्तार को लेकर किसान कार्यशाला

[३० आदिवासी किसानों को उन्नत किस्म के संतरे के पौधे वितरित]

तिनसुकिया: तिनसुकिया जिले में संतरे की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार, ३१ अगस्त को नंबर ३ अलुबाड़ी गांव में किसान कार्यशाला एवं उन्नत किस्म के संतरे के पौधों के वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन टेंगा एवं रोपण फसल अनुसंधान केंद्र, तिनसुकिया के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की अखिल भारतीय समन्वित कृषि परियोजना (फल) योजना के तहत किया गया। इस दौरान क्षेत्र के ३० अनुसूचित जनजाति के किसानों को प्रति किसान ४० उन्नत किस्म के संतरे के पौधे प्रदान किए गए।

पौधों के वितरण के माध्यम से किसानों को व्यावसायिक स्तर पर संतरे के बागान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही उन्हें आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के प्रति जागरूक किया गया।

टेंगा एवं रोपण फसल अनुसंधान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राजकुमार काकती ने बताया कि तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा क्षेत्र में अब तक लगभग ३ से ४ हजार उन्नत किस्म के संतरे के पौधे वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नए संतरे के बागान स्थापित कर किसानों के लिए आय के नए स्रोत तैयार करना और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।

वहीं, अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिजित कुमार साउद ने किसानों को संतरे की आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी प्रबंधन, पौधरोपण, उर्वरक के उपयोग, बागान की देखभाल तथा उत्पादन बढ़ाने की विभिन्न तकनीकों के बारे में किसानों को प्रशिक्षित किया।

अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मनोज गोगोई ने संतरे में होने वाले विभिन्न रोगों एवं कीट-पतंगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रोग एवं कीटों की समय रहते पहचान, समन्वित रोग एवं कीट प्रबंधन तथा वैज्ञानिक नियंत्रण पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में मार्गेरिटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक के प्रतिनिधि विष्णु शर्मा, मंडल अध्यक्ष सुमन खालिन, अनुसूचित जनजाति अध्यक्ष अतुल दास तथा पूर्व प्रधानाध्यापक महम्मद सेलिन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे और किसानों का उत्साहवर्धन किया।

उल्लेखनीय है कि किसान कार्यशाला एवं पौध वितरण कार्यक्रम को तिनसुकिया जिले में संतरे की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक खेती के विस्तार, किसानों की आय बढ़ाने, फल आधारित कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पौध वितरण कार्यक्रम में अनुसंधान केंद्र के कर्मचारी सहस्रजीत बरुआ और मुकुंद दास ने भी सहयोग किया।

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