चाय उद्योग 25-30 साल पहले की स्थिति में नहीं है -कौशिक राय
असम विश्वविद्यालय और टाइ में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर
विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 29 मार्च: टी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया बराक वैली शाखा के 50वें एजीएम को संबोधित करते हुए असम सरकार के कैबिनेट मंत्री और मुख्य अतिथि कौशिक राय ने स्वीकार किया कि आज चाय उद्योग 25-30 साल पहले की स्थिति में नहीं है और इसके कई कारण है, जिन पर चर्चा इस समय संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि असम सरकार आज इस प्रयास में है कि चाय उद्योग और श्रमिक दोनों की उन्नति हो। मंत्री श्री कौशिक राय ने बताया कि भाजपा सरकार ने चाय श्रमिकों की मजदूरी 115 रुपया से बढ़कर 228 रुपया की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले 26 मार्च को 215 चाय बागानों को इंसेंटिव दिया, अब तक 415 चाय बागानों को इंसेंटिव दिया जा चुका है, इस साल 98 करोड़ रूपया दिया गया। मुख्यमंत्री जी ने हर बागान को इंसेंटिव मिले ऐसी योजना बनाने का निर्देश दिया है।

उन्होंने बताया कि पहले चाय बागान में विद्यालयों का खर्च कंपनी को देना पड़ता था हमारी सरकार ने चाय बागान के 650 विद्यालयों का प्रदेशिकीकरण किया। जल जीवन मिशन के माध्यम से पानी की व्यवस्था की। 800 बागान में से 700 चाय बागानों को एक-एक करोड़ रूपया रास्ते के लिए दिया गया। चाय बागानों का रास्ता सरकार बना रही है। उन्होंने कहा कि चाय बागान क्षेत्र में आफ सीजन में मनरेगा जॉब कार्ड के माध्यम से बहुत कुछ काम कराया जा सकता है। इसके लिए आप लोग प्रस्ताव दीजिए सरकार के पास रुपए की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि असम में चाय के 200 साल पूर्ण होने पर झूमर का विश्व स्तरीय नृत्य कार्यक्रम कराया गया। जिसमें प्रधानमंत्री सहित 41 देश के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इससे पूरी दुनिया में असम के चाय की मर्यादा बढ़ी है। इसी वर्ष असम के 680000 हजार चाय श्रमिकों को सरकार सम्मान स्वरूप ₹5000 देने जा रही है।

कौशिक राय ने उद्योग के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया की आप जमीन दीजिए, आपके यहां 33 कवि का विद्युत सब स्टेशन बनाने के लिए सरकार तैयार है। इसके पहले उपभोक्ता आप होंगे, बाकी बची बिजली अन्य लोगों को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 2 करोड़ 45 लाख लोगों को 1 से 10 तारीख के भीतर 5 केजी चावल प्रति व्यक्ति के हिसाब से दिया जा रहा है जो पहले की सरकारों में नियमित रूप से नहीं मिल रहा था। असम सरकार ने सर्वप्रथम अन्य सेवा सप्ताह शुरू किया। उन्होंने कहा कि एक लाख मेट्रिक टन चावल असम के चाय बागानों में जरूरत है। असम सरकार केंद्र सरकार से लेकर के और यह चावल चाय बागानों को देने की योजना बना रही है। चाय बागानों को आता भी दिया जा सके इसके लिए भी योजना पर काम चल रहा है। सिलचर से गुवाहाटी जाने के लिए महा सड़क का काम जनवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा बारक वैली के अंदर सभी नेशनल हाईवे को फोर लेन करने का काम चल रहा है सिलचर से जिरिबिम रोड के लिए 1186 करोड़ रूपया आज ही सैंक्शन हुआ है। बड़ापानी से पांचग्राम के लिए 290 किलोमीटर की सड़क 25000 करोड़ में भारत सरकार बनाने जा रही है जिसके द्वारा 5-6 घंटे में गुवाहाटी पहुंचा जा सकेगा। उद्योग की सुविधा के लिए भांगा और सालछपरा के अलावा रेलवे का एक और यार्ड बिहाड़ा में बनवाने का प्रयास किया जा रहा है। अंत में उन्होंने फिर से दोहराया कि मुख्यमंत्री जी चाय उद्योग और श्रमिक दोनों की उन्नति चाहते हैं।

आसन ग्रहण और अतिथियों के सम्मान के पश्चात एसोसिएशन के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह ने अपने विस्तृत स्वागत वक्तव्य में चाय उद्योग के समक्ष चल रही समस्याओं और उनके समाधान के ऊपर चर्चा की। उपस्थित अतिथियों, सदस्यों और आगंतुकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चाय उत्पादकता को बढ़ावा देने, स्थायी उत्पादन प्रथाओं को प्रोत्साहित करने, चाय श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने, उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान विनिमय को मजबूत करने के साझा उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, टीएआई-बीवीबी (Tea Association of India, Barak Valley Branch) और असम विश्वविद्यालय (AU) एक सहयोग ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहा है।

इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य बराक घाटी में चाय उद्योग की वृद्धि, स्थिरता और कल्याण को सुनिश्चित करना है। दोनों पक्ष इस बात को स्वीकार करते हैं कि चाय उद्योग के विभिन्न अवसरों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए अकादमिक विशेषज्ञता और औद्योगिक प्रथाओं का समावेश आवश्यक है।
संगठन के राष्ट्रीय महासचिव पीके भट्टाचार्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चाय उत्पादक है, तीसरे स्थान पर श्रीलंका है। उन्होंने उद्योग की कई बड़ी समस्याओं का जिक्र किया। समारोह के सम्मानित अतिथि मेजर जनरल बी के नांबियार नया असम सरकार के मुख्यमंत्री डॉ हेमंत विश्व शर्मा और उनके कैबिनेट की प्रशंसा करते हुए कहा कि असम की तेजी से उन्नति हो रही हैं।

इंडियन टी एसोसिएशन के अध्यक्ष ईश्वर भाई उबाडिया ने सुरमा वैली शाखा, इंडियन टी एसोसिएशन की ओर से शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बराक वैली में औद्योगिक भागीदारी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है। हमारा समन्वय संगठन सीसीपीए, बराक वैली शाखा, दोनों संघों के समर्थन से, उद्योग की एकजुट पहचान बनाए रखने में सफल रहा है। चाय बागान में 8 लाख लोग रहते हैं, उसमें से 10% ही बागन में कार्यरत है। काम के लिए जो सही समय होता है, 18 से 30 साल का, इस उम्र के लोग काम में है ही नहीं। जो है भी उनमें अनुपस्थित बड़ी संख्या में हैं। उत्पादन घटने का एक बड़ा कारण यह भी है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे सहमत हूँ कि चाय बागानों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति की बढ़ती दर और खाद्यान्न आपूर्ति पर हो रहा अधिक खर्च वर्तमान संकट के गंभीर मुद्दे हैं। जलवायु परिवर्तन से होने वाली समस्या से निपटने के लिए उद्योग के सभी हितधारकों एवं सरकार को मिलकर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करनी होगी। यदि बराक वैली को बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मित्र राष्ट्र के बाज़ारों में निर्यात करने का अवसर मिलता है, तो यह क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।

सभा का संचालन संगठन के सचिव शरदिंदु भट्टाचार्य ने किया। अतिथियों का स्वागत वाइस चेयरमैन एस एस पुंडीर ने किया। सभा में उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में चाय उद्योग के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व कमलेश सिंह, उद्योगपति और समाज सेवी महावीर जैन, बाबुल होड़, समाजसेवी अवधेश कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश से आए जैविक खाद उत्पादक श्री नारायण सिंह, असम विश्वविद्यालय के कुल सचिव पीके नाथ, प्रोफेसर पीयूष पांडेय, कोलकाता से आए संयुक्त सचिव गीतपम हजारिका, ब्रिगेडियर दीपेंद्र सिंह थापा, इंडियन टी एसोसिएशन सुरमा वैली के सचिव संजय बागची आदि शामिल थे।
टी एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह द्वारा एसोसिएशन के 50वें एजीएम में दिया गया स्वागत वक्तव्य

उपस्थित सभी अतिथियों और सदस्यों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ 50वीं वार्षिक आम सभा में आपका हार्दिक स्वागत करना मेरे लिए सौभाग्य और गर्व का विषय है।
चाय उद्योग की स्थिति:
आज भारत की अर्थव्यवस्था 7.6% की जीडीपी वृद्धि के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन चाय उद्योग कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
असम में चाय उद्योग ने 200 वर्षों का गौरवशाली सफर पूरा किया है, लेकिन विशेष रूप से बराक घाटी में इसका भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
उत्पादन, मूल्य और उत्पादकता:
2024 में बराक घाटी का कुल चाय उत्पादन 39.32 मिलियन किलोग्राम रहा, जबकि 2023 में यह 39.18 मिलियन किलोग्राम था। बराक घाटी में 37 चाय बागान कुल उत्पादन का 70% योगदान देते हैं, जबकि शेष 62 बागानों का योगदान 30% है।
2024 में बराक घाटी का औसत उपज 1100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जबकि असम घाटी में यह 2200 किलोग्राम थी।
मूल्य, मजदूरी और लागत:
बराक घाटी में चाय की औसत कीमत ₹165-₹175 प्रति किलोग्राम है, जबकि उत्पादन लागत ₹200 प्रति किलोग्राम के आसपास है।
2014 में ₹75 दैनिक मजदूरी थी, जो 2023 में ₹228 हो गई है, जो 204% की वृद्धि है। लेकिन इसी अवधि में चाय की कीमतों की औसत वृद्धि मात्र 5.8% रही है। उर्वरक, कोयला, कीटनाशकों जैसी आवश्यक सामग्रियों की लागत पिछले दो वर्षों में काफी बढ़ी है।
बाजार मूल्य और श्रम उत्पादकता:
2024-25 के दौरान असम सीटीसी चाय की औसत नीलामी कीमत ₹241.67 प्रति किलोग्राम रही, जबकि बराक घाटी के लिए यह ₹201.74 प्रति किलोग्राम थी। इस क्षेत्र की भू-आकृति के कारण श्रमिकों की उत्पादकता असम घाटी की तुलना में कम है।
इस 50वीं वार्षिक आम बैठक में, हम उन अग्रदूतों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने इस संगठन की नींव रखी। हम अपने उद्योग की स्थिरता के लिए आवश्यक सुधारों और समाधान की दिशा में कार्य करेंगे ताकि बराक घाटी का चाय उद्योग फिर से समृद्ध हो सके।
“कोई भी रात इतनी लंबी नहीं होती जो सूर्योदय को रोक सके, और कोई समस्या इतनी बड़ी नहीं होती जो आशा को हरा सके।” हम आशा, दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेंगे।
बुनियादी ढांचा:
इस क्षेत्र में लंबे समय से बुनियादी ढांचे की कमी एक गंभीर चिंता का विषय रही है। सड़क संपर्क में सुधार तत्काल आवश्यक है। विशेष रूप से, भूस्खलन से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के माध्यम से माल की ढुलाई चाय बागानों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, सड़क मार्ग से इतनी लंबी दूरी तय करने की परिवहन लागत भी इस संकटग्रस्त उद्योग के लिए महंगी साबित हो रही है।
अतिरिक्त ईंधन लागत:
चाय उत्पादन में ईंधन एक महत्वपूर्ण घटक है। इस क्षेत्र का उद्योग बिजली आपूर्ति की भारी कमी से जूझ रहा है। औसतन, इस क्षेत्र के चाय बागानों को ग्रिड से लगभग 40% बिजली की अनुपलब्धता का सामना करना पड़ता है। अपनी बिजली उत्पादन की लागत ग्रिड आपूर्ति की तुलना में लगभग दोगुनी होती है, जिससे डीजल के माध्यम से उत्पन्न बिजली की अतिरिक्त लागत अंतिम उत्पादन लागत का लगभग 10-12% हो जाती है। यदि ग्रिड से पूरी बिजली उपलब्ध हो, तो यह लागत बचाई जा सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चाय निर्माण के लिए स्थिर वोल्टेज की आवश्यकता होती है, और लगातार वोल्टेज ड्रॉप और बिजली आपूर्ति में बाधा उत्पादन को बाधित करती है। इससे बागानों को अपनी उत्पादन प्रक्रिया जारी रखने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर होना पड़ता है। यदि उत्पादन प्रक्रिया को आवश्यक वोल्टेज न मिलने के कारण रोकना पड़े, तो निर्मित चाय की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
चूंकि बराक घाटी के बागानों में उत्पादन लागत अधिक है, इसलिए अधिकांश बागान अपनी चाय को वास्तविक लागत से कम कीमत पर बेच रहे हैं और भारी नुकसान उठा रहे हैं। इसके कारण उत्पादकों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और उन्हें दैनिक संचालन बनाए रखने के लिए अधिक ऋण लेना पड़ रहा है।
कार्यशील पूंजी और संचित वैधानिक देनदारियों के भुगतान के लिए कोष:
लंबे समय से उत्पादन लागत अधिक और चाय की बिक्री कीमतें कम होने के कारण, इस घाटी के कई चाय बागानों पर वैधानिक देनदारियों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इन देनदारियों को कम करने और बागानों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी सुनिश्चित करने हेतु, हम चाय बोर्ड से आग्रह करते हैं कि कछार क्षेत्र के चाय बागानों को ब्याज मुक्त सॉफ्ट लोन प्रदान किया जाए। यह चाय बागानों की स्थिरता और निरंतरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कर्मचारियों की अनुपस्थिति और पलायन:
चाय बागानों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति और पलायन एक गंभीर समस्या बन गई है। कई बागानों में अनधिकृत अनुपस्थिति की दर 50% से अधिक तक पहुंच गई है, जिससे संचालन बाधित हो रहा है और श्रमिकों की कमी पैदा हो रही है। इसके परिणामस्वरूप, बागान प्रबंधन को वैकल्पिक श्रम स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त लागत बढ़ती है और वित्तीय बोझ और अधिक हो जाता है।
इस समस्या के समाधान के लिए, श्रम की कमी के प्रभाव को कम करने के वैकल्पिक समाधान खोजने की आवश्यकता है। एक संभावित समाधान मशीनीकरण को बढ़ावा देना है। चाय बागान यदि अपने संचालन में यंत्रीकरण को अपनाते हैं, तो वे उत्पादकता बनाए रख सकते हैं और कम श्रमिकों के बावजूद उत्पादन स्तर को संतुलित कर सकते हैं।
मशीनीकरण दोहरा लाभ प्रदान करता है—यह परिचालन दक्षता को बढ़ाता है और स्थायी विकास को प्रोत्साहित करता है। हालांकि प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होगी, लेकिन यह बागानों के लिए दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
असम विश्वविद्यालय, शिलचर:
असम विश्वविद्यालय, शिलचर एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जो उच्च शिक्षा, अनुसंधान और क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय विकास के लिए उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चाय उत्पादकता को बढ़ावा देने, स्थायी उत्पादन प्रथाओं को प्रोत्साहित करने, चाय श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने, उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान विनिमय को मजबूत करने के साझा उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, टीएआई-बीवीबी (Tea Association of India, Barak Valley Branch) और असम विश्वविद्यालय (AU) एक सहयोग ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहा है।
इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य बराक घाटी में चाय उद्योग की वृद्धि, स्थिरता और कल्याण को सुनिश्चित करना है। दोनों पक्ष इस बात को स्वीकार करते हैं कि चाय उद्योग के विभिन्न अवसरों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए अकादमिक विशेषज्ञता और औद्योगिक प्रथाओं का समावेश आवश्यक है।
भूमि अतिक्रमण और अवैध निर्माण:
चाय बागानों को अवैध भूमि अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में, गैर-कामगार लोग बागान की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं और प्रबंधन को धमकी देकर दबाव बना रहे हैं।
इस मुद्दे से निपटने के लिए, एसोसिएशन की शाखा ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर ठोस कदम उठाए हैं। भूमि विभाग के साथ बैठकें आयोजित कर कई विवादों का समाधान किया गया है, जिससे क्षेत्र में कानून व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
हम आगे भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध करते हैं कि वे चाय बागान प्रबंधन को इस संबंध में पूरा सहयोग प्रदान करें।
जलवायु परिवर्तन:
चाय उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना है। चाय उत्पादन स्थिर तापमान और नियमित वर्षा पर निर्भर करता है, लेकिन तापमान में वृद्धि और बारिश के पैटर्न में बदलाव भारतीय चाय बागानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। इससे चाय की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
बराक घाटी की जलवायु ब्रह्मपुत्र घाटी की तुलना में अधिक प्रतिकूल है। इस क्षेत्र में सूखा, बार-बार बाढ़, उष्णकटिबंधीय तूफान, पहाड़ियों की सतह की मिट्टी का क्षरण आदि प्रमुख समस्याएं हैं। इसके अलावा, बराक घाटी पर दीमक जैसे कीटों का गंभीर आक्रमण होता है, जिससे मिट्टी का कटाव होता है और चाय उत्पादन की उत्पादकता काफी कम हो जाती है।
इस स्थिति को देखते हुए, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) जैसी राष्ट्रीय योजनाओं के साथ उद्योग के प्रयासों को संरेखित करना और जल प्रबंधन, जल निकासी तथा चाय की झाड़ियों को पोषित करने वाले पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने पर अधिक ध्यान देना जरूरी हो गया है।
टीआरए (TRA – Tea Research Association) इस उद्योग का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है और इसकी भूमिका उद्योग की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि टीआरए, उद्योग के सक्रिय समर्थन और सहभागिता के साथ मिलकर, इन लगातार बढ़ती चुनौतियों का समाधान निकालने में हमारा मार्गदर्शन करेगा।
वेतन संबंधी मुद्दे:
चाय उद्योग मुख्य रूप से श्रम पर निर्भर करता है, जहां संगठित चाय बागानों के कुल उत्पादन लागत का लगभग 60% श्रम लागत होती है। नकद वेतन के अलावा, चाय बागान अपने श्रमिकों को कई प्रकार की सुविधाएँ भी प्रदान करते हैं, जिनमें मुफ्त आवास, रियायती राशन, चिकित्सा सुविधाएँ, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य भत्ते शामिल हैं। इन लाभों का प्रावधान प्लांटेशन लेबर एक्ट सहित कई कानूनों के तहत किया जाता है।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि असम सरकार ने असम के चाय बागान श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने हेतु एक न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। हम अपने श्रमिकों को सर्वोत्तम वेतन और जीवन की बेहतरीन परिस्थितियाँ प्रदान करना चाहते हैं, लेकिन तैयार चाय के लिए उचित मूल्य प्राप्त किए बिना, इसे बनाए रखना दिनों-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
अनाज:
खुले बाजार से चाय बागान प्रबंधन द्वारा खाद्यान्न खरीदने की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे बागान की कुल लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर बराक घाटी के चाय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ा है और उत्पादकों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।
हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह ऐसी योजनाएँ लागू करे, जिनके तहत उद्योग को भारतीय खाद्य निगम (FCI) के OMSS (ओपन मार्केट सेल स्कीम) के तहत चावल का कोटा उपलब्ध कराया जाए। इस योजना के तहत, चावल की कीमत लगभग ₹22.50 प्रति किलो निर्धारित हो सकती है, जिससे प्रबंधन को खुले बाजार से ऊँची दरों पर खाद्यान्न खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लागत कम होगी।
बिजली:
जैसा कि मैंने अपने भाषण में पहले भी उल्लेख किया, अनियमित विद्युत आपूर्ति के कारण महंगे कैप्टिव पावर जनरेशन (स्व-निर्मित बिजली उत्पादन) पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है। चाय उद्योग, जो कि एक सदी पुराना रोज़गार देने वाला कृषि-आधारित उद्योग है, इसकी जीवंतता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि भारतीय चाय बोर्ड प्रति यूनिट ₹15 की सब्सिडी प्रदान करे और साथ ही असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) को 24×7 निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दे।
हम असम सरकार और APDCL प्राधिकरण से अनुरोध करते हैं कि वे बराक घाटी के सभी चाय कारखानों को समर्पित फीडर लाइन से जोड़े और चाय बागानों के आसपास निर्माणाधीन 33KVA विद्युत उप-स्टेशनों को शीघ्र पूरा करें ताकि इस क्षेत्र का चाय उद्योग सस्ती दरों पर निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली प्राप्त कर सके।
टेलीफोन एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी:
इस क्षेत्र के चाय बागान इंटरनेट कनेक्टिविटी की दृष्टि से “शैडो एरिया” (नेटवर्क कवरेज विहीन क्षेत्र) में आते हैं, जबकि जीएसटी बिलिंग से लेकर पीएफ रिटर्न दाखिल करने तक की सभी प्रक्रियाएँ अब डिजिटल हो गई हैं। विलंबित सबमिशन पर जुर्माना और अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है।
मैं इस क्षेत्र के जिला प्रशासन, बीएसएनएल और अन्य नेटवर्क प्रदाताओं का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि वे इस समस्या का समाधान करें ताकि घाटी के प्रत्येक चाय बागान को किफायती दरों पर विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त हो सके।
सड़क और परिवहन:
विशेषकर वर्षा ऋतु में चाय उद्योग से जुड़े इनपुट और आउटपुट का परिवहन गंभीर रूप से बाधित रहता है क्योंकि बराक घाटी से मेघालय होते हुए गुवाहाटी जाने वाली सड़कों की स्थिति बेहद खराब है और भूस्खलन के कारण मार्ग अवरुद्ध हो जाता है।
हम संबंधित प्राधिकरण से आग्रह करते हैं कि पूर्व-पश्चिम गलियारे, अर्थात् शिलचर-सौराष्ट्र महामार्ग (जो सिलचर को गुवाहाटी से लंका के रास्ते जोड़ता है) का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए, जिससे इस क्षेत्र के औद्योगिक परिवहन को सुगम बनाया जा सके।
हम केंद्र और राज्य सरकार दोनों के आभारी हैं कि उन्होंने शिलचर से गुवाहाटी तक बारापानी (मेघालय) के रास्ते एक एक्सप्रेस हाईवे बनाने की योजना को मंजूरी दी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹25,000 करोड़ रखी गई है। हमें उम्मीद है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होगा।
चाय बागानों को जिला मुख्यालयों और नजदीकी शहरों से जोड़ने वाली आंतरिक सड़कों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
प्रदूषण:
स्वयं के बागान वाले चाय निर्माण इकाइयों को प्रदूषण-मुक्त एवं पर्यावरण-अनुकूल संस्थान घोषित किया जाना चाहिए और उन पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाए जाने वाले भारी शुल्क से छूट दी जानी चाहिए। मैं चाय बोर्ड से इस विषय पर गंभीरता से कार्य करने का अनुरोध करता हूँ।
मनरेगा योजना:
असम के माननीय श्रम मंत्री ने हाल ही में सिलचर के दौरे के दौरान जानकारी दी कि सरकार ने मनरेगा योजना के तहत श्रमिकों को शीतकालीन अवधि में विभिन्न कार्यों जैसे कि सड़कों, नालों, जल निकायों आदि के विकास के लिए काम देने का प्रावधान किया है। सभी सदस्यों से अनुरोध किया जाता है कि वे इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने स्थानीय ब्लॉक विकास कार्यालय और ग्राम पंचायत अधिकारियों से संपर्क बनाए रखें।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा:
हम स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को हमारे चाय बागानों में दवा और पीपीपी अस्पतालों के रूप में निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हैं। हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में चाय बागानों को प्रशासन से आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सहित हर प्रकार का सहयोग प्राप्त होता रहेगा।
यह स्वीकार किया जाता है कि चाय बागानों में डॉक्टरों की कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जिससे नए मेडिकल स्नातकों को ग्रामीण क्षेत्रों में लागू सफल मॉडलों की तर्ज पर चाय बागानों में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
हम असम सरकार को भी धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने चाय बागानों के लिए “आयुष्मान आरोग्य निकेतन” की एक अच्छी संख्या को मंजूरी दी है।
औद्योगिक संबंध:
औद्योगिक संबंध सौहार्दपूर्ण और सुचारू बने हुए हैं। किसी भी प्रकार की समस्याओं और अवांछित मुद्दों को आपसी चर्चा से सुलझा लिया गया है, और हमें हमारे ट्रेड यूनियन मित्रों से सहयोग और समर्थन प्राप्त हो रहा है।
कानून और व्यवस्था:
यह संघ (एसोसिएशन) जिला प्रशासन से मिले निरंतर सहयोग को खुले दिल से स्वीकार करता है। हमारा प्रशासन से संवाद हमेशा सक्रिय रहा है, जिससे कई संभावित विवादों को समय रहते रोका जा सका है।
सरकारी पहल और आभार:
हम असम सरकार के उन सभी प्रयासों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जो असम के चाय उद्योग को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए किए जा रहे हैं। “असम टी इंडस्ट्रीज स्पेशल इंसेंटिव्स स्कीम (ATISIS) 2020” सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल रही है, जिसने हाल के समय में इस संकटग्रस्त उद्योग को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की है।
हम असम सरकार के वित्त विभाग के भी आभारी हैं, जिन्होंने इस योजना के तहत सब्सिडी राशि का समय पर वितरण सुनिश्चित किया है, जिससे चाय उद्योग को मजबूती मिली है।
हालांकि, सूचना संख्या ECF-197334/144 दिनांक 05.08.2024 के संदर्भ में, हम सरकार से निम्नलिखित अनुरोध करते हैं:
1. सभी वैध दावों पर विचार किया जाए, जो संबंधित चाय बागानों द्वारा सहायक दस्तावेजों के साथ वित्तीय वर्ष के दौरान सब्सिडी भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए हैं।
2. यदि बजटीय आवंटन सभी वैध दावों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो उन दावों को अगले वित्तीय वर्ष में शामिल किया जाए।
3. पिछले वित्तीय वर्षों में प्रस्तुत किए गए दावों के आधार पर वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि के साथ पर्याप्त बजटीय आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
हम असम सरकार के प्रति “असम कराधान (निर्दिष्ट भूमि पर कर) अधिनियम” के तहत कर अवकाश को 1 जनवरी 2025 से अगले दो वर्षों तक बढ़ाने के लिए भी आभार व्यक्त करते हैं।
असम सरकार द्वारा चाय बागान श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ:
हम सरकार द्वारा चाय बागान श्रमिकों के लिए लागू विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
प्रधानमंत्री आवास योजना
चाय बागान धन पुरस्कार योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
प्रधानमंत्री जनधन योजना
जल जीवन मिशन
जगन्नाथ सामुदायिक भवन
चाय बागान की गर्भवती महिलाओं के लिए वेतन क्षतिपूर्ति योजना
218 मॉडल हाई स्कूलों की स्थापना
यह सभी योजनाएँ चाय बागान श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। हम इस दिशा में सरकार के प्रयासों की सराहना करते हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में असम सरकार के प्रस्ताव:
हरी पत्तियों पर उपकर (Cess on Green Leaf):
हम असम की माननीय वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण में किए गए इस घोषणा के लिए आभारी हैं कि “असम कराधान (निर्दिष्ट भूमि पर कर) अधिनियम, 1990” के तहत हरी चाय की पत्तियों पर कर की वसूली और भुगतान को 1 जनवरी 2025 से अगले दो वर्षों तक स्थगित रखा जाएगा।
असम एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति—2025:
असम सरकार ने “असम एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति—2025” को अधिसूचना संख्या PEL. 19/2025/13 दिनांक 24 फरवरी, 2025 के माध्यम से लागू किया है। हम सरकार को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने इस नीति में चाय उद्योग के लिए विशेष प्रोत्साहनों का प्रावधान किया है।
डिजिटल असम टी-एक्सचेंज:
हम असम की माननीय वित्त मंत्री द्वारा बजट भाषण में भारत के पहले “AI एवं ब्लॉकचेन-सक्षम चाय नीलामी प्लेटफार्म” की घोषणा के लिए आभारी हैं। हमें आशा है कि यह डिजिटल मंच लेन-देन को सुरक्षित और मूल्य निर्धारण को पारदर्शी बनाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगा। इस पहल से असम के चाय उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
असम चाय के 200 वर्ष:
हम असम राज्य सरकार के आभारी हैं कि उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के हित में कार्य करते हुए 6.8 लाख चाय बागान श्रमिकों को एकमुश्त 5000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की।
अंत में उन्होंने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया और चाय उद्योग के सदस्यों को नए चाय सत्र के लिए शुभकामनाएं दी।
