जोरहाट में हनी-ट्रैप रैकेट का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

[दो महिलाएं भी आरोपी; पुलिस को कई आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को निशाना बनाए जाने का संदेह]

जोरहाट: जोरहाट पुलिस ने कथित हनी-ट्रैपिंग और जबरन वसूली के एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। यह कार्रवाई तिनसुकिया के एक निजी क्षेत्र के बैंक प्रबंधक की शिकायत के बाद की गई।

जोरहाट सदर थाना के प्रभारी अधिकारी हृषिकेश हजारिका के अनुसार, यह मामला २ अक्टूबर को सामने आया, जब बैंक प्रबंधक ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया कि एक गिरोह ने उसे हनी-ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किया और उससे जबरन पैसे वसूले।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता की जुलाई में इंस्टाग्राम के माध्यम से जोरहाट की एक महिला से मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच सोशल मीडिया के जरिए संबंध विकसित हुए। १४ अगस्त को महिला ने कथित तौर पर बैंक प्रबंधक को जोरहाट बुलाया।

बैंक प्रबंधक रात करीब १ बजे जोरहाट पहुंचा, जिसके बाद महिला उसे सिओनी अली इलाके में स्थित एक किराए के मकान में ले गई। पुलिस के अनुसार, दोनों के अंदर रहने के दौरान दो अज्ञात युवक कथित तौर पर दरवाजे पर पहुंचे। महिला द्वारा दरवाजा खोलने के बाद दोनों अंदर दाखिल हो गए।

आरोप है कि युवकों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया और वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने तथा पीड़ित के परिवार के सदस्यों को भेजने की धमकी दी। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर २ लाख रुपये की मांग की, जिसे शिकायतकर्ता ने डर के कारण दे दिया। इसके बाद गिरोह ने कथित तौर पर १ लाख रुपये और मांगे, जिसे भी पीड़ित ने भुगतान कर दिया।

पुलिस के अनुसार, बैंक प्रबंधक ने आरोपियों को कुल ३ लाख रुपये देने के बाद भी उन्हें और ५ लाख रुपये देने की मांग का सामना करना पड़ा।

लगातार धमकियों और जबरन वसूली की मांग से परेशान होकर बैंक प्रबंधक ने जोरहाट पुलिस से संपर्क किया और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी।

जोरहाट के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना प्रभारी हृषिकेश हजारिका के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। २ अक्टूबर को दो युवकों—संजीब दास और अंकित पॉल, दोनों जोरहाट सदर थाना क्षेत्र के गरमूर निवासी—को गिरफ्तार किया गया। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस संबंध में जोरहाट थाने में केस नंबर ३३८/२०२६ दर्ज किया गया है।

जांच के दौरान पुलिस ने मोरमी दास निओग की पहचान कथित तौर पर गिरोह की संदिग्ध मास्टरमाइंड के रूप में की। उसे पकड़ने के लिए पुलिस की एक टीम डिब्रूगढ़ भेजी गई। हालांकि वह शुरुआत में पुलिस के हाथ नहीं लगी, लेकिन बाद में एक विशेष सुराग के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने बेबी बोरा और उसके पति अंकित बोरा को भी गिरफ्तार किया। इसके साथ ही गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या पांच हो गई, जिनमें तीन पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं।

हृषिकेश हजारिका ने बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह ने इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाकर अन्य लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है।

पुलिस को संदेह है कि आर्थिक रूप से संपन्न लोगों, जिनमें कारोबारी तथा सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी शामिल हैं, को इस गिरोह ने अपना निशाना बनाया हो सकता है।

हृषिकेश हजारिका ने कहा, “यह हनी-ट्रैपिंग का पूरी तरह स्पष्ट मामला है।”

जांचकर्ता अब आरोपियों से बरामद डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रहे हैं। साथ ही पुलिस कथित गिरोह के अन्य संभावित पीड़ितों और सदस्यों की पहचान करने में जुटी है।

मामले में आगे की जांच जारी है।

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