[केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने नए ग्रेनेज भवन और कोल्ड स्टोरेज इकाई का किया उद्घाटन; केंद्र में तीस लाख तक रेशम के बीजों के भंडारण की क्षमता]
जोरहाट: असम के रेशम उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जोरहाट के रोरैया स्थित रेशम बीज उत्पादन केंद्र (एसएसपीसी) में नवनिर्मित ग्रेनेज भवन और कोल्ड स्टोरेज इकाई का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का संचालन केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) और राष्ट्रीय रेशम बीज संगठन (एनएसएसओ) के अंतर्गत किया जा रहा है।
केंद्रीय विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने इन सुविधाओं का उद्घाटन किया। नवनिर्मित कोल्ड स्टोरेज इकाई में तीस लाख तक रेशम के बीजों को सुरक्षित रखने की क्षमता है। इससे स्थानीय रेशम किसानों को बीजों की कमी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद अतिथियों को पारंपरिक रेशमी चेलेंग, गमोसा और रेशम से निर्मित हस्तशिल्प भेंट कर सम्मानित किया गया।
सीएसबी-सीएमईआरटीआई, जोरहाट के निदेशक डॉ. कार्तिक नियोग ने स्वागत भाषण देते हुए असम के रेशम उद्योग को मजबूत बनाने और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर रेशम बीज उत्पादन प्रक्रिया और दो सफल किसानों की उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान समर्थ योजना के प्रशिक्षुओं के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया तथा उन्हें प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अपने अनुभव भी साझा किए।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने रेशम क्षेत्र के विकास और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस उद्योग से जुड़े किसानों, बुनकरों, कारीगरों तथा अन्य हितधारकों के योगदान की सराहना करते हुए उनके अथक परिश्रम की प्रशंसा की।
काजीरंगा के सांसद कामाख्या प्रसाद तासा ने किसानों से शहतूत, मूगा और एरी रेशम की खेती का विस्तार करने तथा उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया। असम की रेशम निदेशक लखिमी दत्ता ने आधुनिक तकनीक के उपयोग के माध्यम से राज्य के रेशम उद्योग को नई दिशा देने पर जोर दिया।
असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दीपज्योति राजखोवा ने किसानों की क्षमता बढ़ाने और रेशम उद्योग में उपलब्ध व्यावसायिक संभावनाओं का समुचित उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया। जोरहाट के विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा कि यह नया केंद्र असम के रेशम एवं वस्त्र उद्योग को नई गति प्रदान करेगा।
बेंगलुरु स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के सदस्य सचिव पी. शिवकुमार ने अपने संबोधन में उद्यमिता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने रेशम उद्योग से जुड़े लोगों को केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों के अलावा वैज्ञानिक, रेशम उद्योग से जुड़े हितधारक, समर्थ योजना के प्रशिक्षु तथा संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में बेंगलुरु स्थित सीएसबी-एनएसएसओ की निदेशक डॉ. मोंटिरा मूर्ति ने धन्यवाद ज्ञापन किया।