छात्र संगठन गठन की प्रक्रिया पर उठा सवाल, पूर्वोत्तर हिंदुस्तानी युवा मंच ने जताई कड़ी आपत्ति
तिनसुकिया, 27 जनवरी:
तिनसुकिया जिले के धौला में दिनांक 18 को अखिल असम भोजपुरी छात्र संस्था के गठन के नाम पर आयोजित एक सभा की प्रक्रिया पर पूर्वोत्तर हिंदुस्तानी युवा मंच ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। मंच के अध्यक्ष श्री सुनील सिंह ने इस पूरी प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसकी निंदा की है।
सभा में असम के विभिन्न जिलों से समाज-प्रेमी एवं जागरूक लोग उपस्थित थे, इसके बावजूद छात्र संगठन के गठन के दौरान न तो किसी प्रकार का चुनाव कराया गया और न ही छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। सबसे गंभीर बात यह रही कि लगभग 55 वर्ष आयु के एक व्यक्ति को छात्र संगठन का केंद्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया, जबकि समिति में एक भी युवा या छात्र को स्थान नहीं दिया गया। इस निर्णय से भोजपुरी समाज के छात्रों में गहरी नाराज़गी और निराशा देखी जा रही है।
पूर्वोत्तर हिंदुस्तानी युवा मंच का स्पष्ट मत है कि छात्र संस्था का नेतृत्व छात्रों के हाथों में ही होना चाहिए। मंच का कहना है कि यह संस्था सामाजिक सेवा और असम में भोजपुरी समाज के उत्थान के उद्देश्य से बनाई गई है, ऐसे में नेतृत्व चयन की प्रक्रिया का लोकतांत्रिक और पारदर्शी न होना गंभीर चिंता का विषय है।
मंच के अध्यक्ष श्री सुनील सिंह ने कहा कि “छात्रों की सहभागिता के बिना लिए गए ऐसे निर्णय न केवल संस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं। यदि किसी वरिष्ठ व्यक्ति को मार्गदर्शन देना था, तो उन्हें सलाहकार समिति में रखा जा सकता था, जिससे युवाओं का मनोबल बढ़ता।”
उन्होंने आगे कहा कि “पद के लोभ में युवा पीढ़ी की अनदेखी करना किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है।”
सुनील सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी व्यक्ति समाज की एकता को कमजोर करने या गलत दिशा देने का प्रयास करेगा, पूर्वोत्तर हिंदुस्तानी युवा मंच उसका खुलकर विरोध करेगा।
युवा मंच ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए मांग की है कि—
- छात्र संस्था के नेतृत्व का चयन छात्रों के बीच से, चुनाव के माध्यम से किया जाए।
- संस्था के मूल उद्देश्य—सामाजिक सेवा और भोजपुरी समाज का उत्थान—को सर्वोपरि रखा जाए।
- वर्तमान स्वरूप में गठित इस छात्र संस्था को पूर्ण रूप से भंग किया जाए।
मंच के अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में इस प्रकार छात्रों की अनदेखी कर निर्णय लिए गए, तो भोजपुरी समाज और छात्र संगठन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे।
अंत में श्री सुनील सिंह ने कहा कि “असम में कार्यरत सभी भोजपुरी संगठनों को न केवल अपने समाज के अधिकारों की आवाज़ उठानी चाहिए, बल्कि असम के विकास और उसके सुख-दुख को भी अपना कर्तव्य समझना चाहिए, क्योंकि हम सभी असम की धरती पर रहते हैं।”