डिब्रूगढ़: ग्रामीण खाद्य-प्रसंस्करण उद्यमों को मजबूत करने तथा स्थानीय उद्यमियों को ऋण और सरकारी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुरुवार को डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) के तहत संयुक्त प्रखंड स्तरीय क्रेडिट कैंप का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एएसआरएलएम) के डिब्रूगढ़ जिला मिशन प्रबंधन इकाई द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से डिब्रूगढ़ स्थित हथकरघा व्यापार केंद्र के सभागार में किया गया।
जिले के सात प्रखंडों से सौ से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों ने कैंप में भाग लिया। पीएमएफएमई योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के बीच चेक भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री बिमल बोरा ने कहा कि सरकार डिब्रूगढ़ में पहले से संचालित सूक्ष्म खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयों को मजबूत करने के साथ-साथ नए और नवाचार आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने कहा कि पीएमएफएमई योजना महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग में सुधार करने तथा धीरे-धीरे असम से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेगी।
अधिकारियों ने प्रतिभागियों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न ऋण योजनाओं, ऋण आवेदन प्रक्रिया, उत्पादों की पैकेजिंग, मार्केटिंग तथा बाजार का विस्तार करने की रणनीतियों के बारे में जानकारी दी।
पीएमएफएमई योजना के तहत पात्र लाभार्थी सूक्ष्म खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पैंतीस प्रतिशत तक सब्सिडी के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण तथा योजना के तहत उपलब्ध अन्य सहायता के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि यह पहल केवल ऋण सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित कृषि एवं खाद्य उत्पादों में मूल्यवर्धन, बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण उत्पादकों को बड़े बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से भी संचालित की जा रही है।
अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह पहल डिब्रूगढ़ में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, क्रेडिट कैंप से अधिक से अधिक ग्रामीण उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को सूक्ष्म खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा उद्यमों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।