खासी मंदारिन की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों की कार्यशाला

तिनसुकिया: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (फल) के तहत तिनसुकिया स्थित साइट्रस एवं प्लांटेशन क्रॉप्स अनुसंधान केंद्र की ओर से शुक्रवार को तिनसुकिया जिले के मिर्का माजुली गांव में खासी मंदारिन की व्यावसायिक खेती में उन्नत एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को लेकर विशेष किसान कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में खासी मंदारिन की खेती से जुड़े अनुसूचित जाति के तीस किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक किसान को चालीस उच्च गुणवत्ता वाले खासी मंदारिन के पौधे उपलब्ध कराए गए। इस प्रकार कुल एक हजार दो सौ पौधे किसानों के बीच वितरित किए गए।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. मनुज गोगोई ने किसानों से वितरित पौधों का उचित तरीके से रोपण करने तथा नियमित देखभाल और रखरखाव सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि पौधों का स्वस्थ विकास हो और बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए तिनसुकिया स्थित साइट्रस एवं प्लांटेशन क्रॉप्स अनुसंधान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. राज कुमार काकती ने कहा कि केंद्र तिनसुकिया जिले के अनुसूचित जाति के किसानों को खासी मंदारिन के बाग स्थापित करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने कहा कि खासी मंदारिन तिनसुकिया जिले का एक महत्वपूर्ण कृषि संसाधन होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करने की व्यापक क्षमता रखता है।

कार्यशाला के दौरान किसानों को बाग की स्थापना, गुणवत्तापूर्ण पौधों का रोपण, बाग प्रबंधन, पौधों की देखभाल तथा उत्पादकता बढ़ाने के उपायों सहित खासी मंदारिन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया।

तकनीकी सत्रों का संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बिजित कुमार साउद तथा वैज्ञानिक डॉ. मनुज गोगोई और डॉ. जाह्नबी हजारिका ने किया। इस दौरान किसानों के साथ संवाद भी किया गया और टिकाऊ खासी मंदारिन उत्पादन के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में मरघेरिटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक के प्रतिनिधि श्री बिष्णु शर्मा और श्री सुमन खालिन भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यशाला को तिनसुकिया जिले में खासी मंदारिन की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा कृषि आधारित आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Leave a Comment