केंद्रीय जागृति परियोजना के तहत असम विश्वविद्यालय में कानून जागरूकता शिविर

शिलचर, 23 अगस्त: “सक्षम युवा, दृढ़ भारत” के संदेश के साथ केंद्रीय जागृति परियोजना-2026 के तहत शनिवार को केंद्रीय विद्यालय, असम विश्वविद्यालय, शिलचर में कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए कानून जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को कानून, उनके अधिकारों तथा न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का आयोजन असम विश्वविद्यालय के विधि विभाग ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), कछार के सहयोग से संचालित विश्वविद्यालय के लीगल एड क्लिनिक के साथ मिलकर किया। शिविर में कानून और उसके उद्देश्यों, मौलिक एवं अन्य कानूनी अधिकारों, साइबर उत्पीड़न और साइबर बुलिंग तथा किशोर न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए।

कार्यक्रम में विधि विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं लीगल एड क्लिनिक के संयुक्त समन्वयक डॉ. संदीप कुमार सुमन और डॉ. दृष्टिरूपा पाटगिरी ने प्रमुख वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उनके मार्गदर्शन में बीए/एलएलबी के सातवें सेमेस्टर और एलएलएम के प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने भी सत्रों के संचालन में सहयोग किया।

बीए/एलएलबी (ऑनर्स) सातवें सेमेस्टर के छात्र माधवेंदु चक्रवर्ती ने साइबर उत्पीड़न, साइबर बुलिंग और किशोर न्याय बोर्ड से संबंधित विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं, इसी बैच के छात्र समर कांत ने मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए संवैधानिक संरक्षण तथा अधिकार-सचेत नागरिक बनने के महत्व को रेखांकित किया।

शिविर के अंत में विद्यार्थियों ने किशोर अपराध एवं दुष्कर्मों के संभावित परिणामों को समझने के लिए आयोजित ‘परिणाम मानचित्रण’ गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग लिया।

आयोजकों ने कहा कि विद्यार्थियों में प्रारंभिक स्तर से ही कानूनी जागरूकता विकसित करना एक जिम्मेदार और अधिकार-सचेत समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि लीगल एड क्लिनिक, असम विश्वविद्यालय, शिलचर समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से भविष्य में भी इस प्रकार की पहल जारी रखेगा।

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