विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 21 सितंबर: एन आइ टी के छात्र की आत्महत्या की संसद में भी गुंजी आवाज, करीमगंज के सांसद कृपानाथ माला ने पूरे घटना की विशेष जांच की मांग उठाई। छात्रों ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है।
15 सितंबर को पांचवें सेमेस्टर के छात्र कोज बुकर की आत्महत्या के 5 दिन बाद एनआइटी प्रशासन और निदेशक द्वारा स्पष्टीकरण देने के बावजूद छात्रों के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।चौथे दिन भी छात्रों का आमरण अनशन जारी है। छात्रों का आरोप है कि एनआइटी प्रशासन जानबुझ कर उनके आंदोलन की उपेक्षा कर रहा है। कोज बुकर की आत्महत्या के दिन से लेकर आज तक प्रशासन का रवैया उपेक्षा पूर्ण हीं है। छात्रों का कहना है कि आत्महत्या के बाद कई घंटे तक कमरे में शव लटकता रहा किंतु कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी उन लोगों की खोज खबर लेने नहीं आया। अगर प्रशासन ने उसी दिन संवेदना दिखाई होती तो शायद रात की घटना ना घटती। एक प्रोफेसर ने तो हंसते हुए बुकर के आत्महत्या का मजाक उड़ाया।
एक छात्र ने बताया कि बीके राय इतने क्रूर है कि पूरे क्लास के सामने जबकि उसके पिता आईसीयू में भर्ती थे, जबरन फोन करके उन्हें कहा की परीक्षा नहीं देने दूंगा। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी छह मांगे पूरी नहीं होती उनका आंदोलन जारी रहेगा। आमरण अनशन पर बैठने वाले कई छात्र मेडिकल कॉलेज में एडमिट है, इसलिए उनकी जगह अब नए छात्र बैठने के लिए तैयार है। 10 लोग आमरण अनशन पर हैं बाकी क्रमिक अनशन कर रहे हैं। छात्रों का कहना था कि सभी छात्र एकजुट है और उन्हें तोड़ने के प्रयास सफल नहीं होंगे।
क्या है छात्रों की 6 मांग:
पहला- एनआइटी प्रशासन को विलंब से रिस्पांस के लिए माफी मांगनी होगी और समाचार पत्रों में झूठी और भ्रामक खबरें ना छपवाकर सटीक तथ्य के साथ समाचार प्रकाशित करवाना पड़ेगा।
दूसरा- प्रोफेसर बीके राय को दिन अकादमी के पद से बिना सर त्यागपत्र देना होगा ताकि कोज बुकर की आत्मा को न्याय मिले।
तीसरा- एनआइटी प्रशासन को एफआईआर दर्ज करना होगा, जिससे सही जांच करके कोज बुकर आत्महत्या के आरोपियों को दंडित किया जाए। कोज बुकर के परिवार को आर्थिक, कानूनी और सुरक्षात्मक सहायता देनी होगी।
चौथा – यह लिखित आश्वासन देना होगा की आंदोलन से जुड़े किसी भी छात्र के ऊपर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पांचवां – एनआइटी प्रशासन द्वारा आरोपी छात्रों के ऊपर जारी और पेंडिंग अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना ना घटे।
छठा- एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करना होगा जो एन आइ टी में एकेडमिक रिफॉर्म्स के लिए काम करेगी, उक्त कमेटी में विभिन्न उच्च अधिकारियों के साथ एनआइटी प्रशासन और छात्रों का प्रतिनिधि भी रहना होगा।
उपरोक्त मांगों के बारे में छात्रों का कहना है कि निदेशक को हम लोगों के साथ सीधे बातचीत करनी चाहिए, वह जहां कहीं भी है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बात हो सकती है। निदेशक महोदय हमारे अभिभावक हैं उन्हें विचार करना होगा कि इतने छात्र बिना खाए पिए 4 दिन से अनशन पर बैठे हैं, यदि किसी को कुछ हो गया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। छात्रों का आरोप है कि उन्हें विभिन्न प्रकार से आंदोलन खत्म करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, धमकी भी दी जा रही है। इसलिए छात्र कैमरे के सामने आकर बोलने में और अपना नाम बताने में कतरा रहे हैं।
कैप्शन: एनआइटी प्रशासन द्वारा कार्रवाई के भय से छात्रों ने चेहरे के सामने तख्तियां लगा ली