डिब्रूगढ़: असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एएमसीएच), डिब्रूगढ़ ने नेशनल इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट (एनईएलएस) कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों के लिए पांच दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया।
यह प्रशिक्षण एएमसीएच स्थित एनईएलएस स्किल सेंटर में १७ से २१ अगस्त, २०२६ तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के डॉक्टरों ने भाग लिया।
कोर्स का औपचारिक उद्घाटन असम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य-सह-मुख्य अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. संजीब काकती ने किया।
एनईएलएस कार्यक्रम भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की पहल है। इसका उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के आपातकालीन विभागों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों के लिए आपातकालीन जीवन रक्षक प्रशिक्षण को मानकीकृत करना है।
एएमसीएच का एनईएलएस स्किल सेंटर पूर्वोत्तर भारत का तीसरा ऐसा केंद्र है। इस केंद्र की स्थापना भारत सरकार की ओर से ₹२.६ करोड़ की वित्तीय सहायता से की गई है। यहां उन्नत मेडिकल सिमुलेटर, डमी मैनिकिन और उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण का नेतृत्व एएमसीएच के सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं एनईएलएस स्किल सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. रजवी दास ने किया। उन्हें असम मेडिकल कॉलेज और राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों के संकाय सदस्यों का सहयोग मिला।
प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों को सैद्धांतिक सत्रों, केस डिस्कशन और व्यापक व्यावहारिक सिमुलेशन प्रशिक्षण के माध्यम से उन्नत एयरवे प्रबंधन, वेंटिलेटर सपोर्ट, तीव्र हृदय संबंधी आपात स्थितियों, ट्रॉमा रिससिटेशन, आपदा प्रबंधन तथा बच्चों और नवजातों के पुनर्जीवन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का प्रशिक्षण दिया गया।
कोर्स में प्रभावी प्रशिक्षण पद्धतियों पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि प्रशिक्षित डॉक्टर आगे डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों के नए बैचों को एनईएलएस प्रशिक्षण प्रदान कर सकें।
एएमसीएच के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन पूर्वोत्तर क्षेत्र में आपातकालीन चिकित्सा कौशल और चिकित्सा प्रशिक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।