उल्लावास में 27वीं बार सजा बाबा लटुरिया कुश्ती दंगल, पहलवानों ने दिखाया दमखम

विशेष प्रतिनिधि उल्लावास, गुरुग्राम, 15 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उल्लावास गांव में आयोजित होने वाला पारंपरिक बाबा लटुरिया कुश्ती दंगल इस वर्ष भी उत्साह और जोश के साथ संपन्न हुआ। पिछले 27 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे इस दंगल की शुरुआत करीब 27 वर्ष पूर्व धर्मवीर जी के प्रयासों से हुई थी। प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को समस्त ग्रामवासी मिलकर इस आयोजन को भव्य रूप देते हैं।

इस वर्ष भी दंगल में बड़ी संख्या में पहलवानों ने हिस्सा लिया और अपनी कुश्ती कला एवं दमखम का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता को देखने के लिए ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पारंपरिक कुश्ती के मुकाबलों ने दर्शकों में खासा उत्साह पैदा किया।

दंगल का संचालन करते हुए स्थानीय वरिष्ठ समाजसेवी सतीश उल्लावास नागर ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक खेलों को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि नशा आज समाज और युवा पीढ़ी के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। नशे के कारण अनेक परिवार बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि “नशा नाश का मूल है” और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर नशे के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए।

उन्होंने युवाओं से खेलों और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ अनुशासन और सकारात्मक सोच भी विकसित करते हैं।

कार्यक्रम में स्थानीय विधायक तेजपाल तंवर, पार्षद मनीष हरसाना, पार्षद नारायण भड़ाना, सुशील भारद्वाज बिल्डर, मार्केट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष बेगराज यादव, धर्मवीर डागर, जगदीश अंबावता, किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष महेश चौहान, सतबीर सरपंच, राजवीर पहलवान, अमित उल्लावास, प्रीतम चेयरमैन, राम अवतार पहलवान, अशोक उल्लावास, नारायण इंस्पेक्टर, नंदकिशोर उर्फ कपूर, सुंदर चेयरमैन, आजाद सरपंच, मनीष चौधरी, अनिल उल्लावास, डॉ. हरिराम, अफलातून सरपंच, धर्म सरपंच, हरचंद सरपंच, महेश सरपंच, चौधरी राममीत, मानचंद उल्लावास, धर्मेंद्र पहलवान सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

आयोजकों ने दंगल को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी ग्रामीणों, पहलवानों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। ग्रामवासियों ने भविष्य में भी इस पारंपरिक आयोजन को निरंतर जारी रखने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं खेल परंपराओं से जोड़ने का संकल्प दोहराया।

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