21 अगस्त को जंतर-मंतर पर जुटी बड़ी भीड़, 50 से अधिक हिरासत में; 23 अगस्त को कनॉट प्लेस में फिर प्रदर्शन, 20 से ज्यादा हिरासत में
नई दिल्ली, 24 अगस्त। जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाने की मांग को लेकर दिल्ली में शुरू हुआ ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ चार दिनों में जंतर-मंतर से आगे बढ़कर कनॉट प्लेस तक पहुंच गया है। 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति जुटे प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। 23 अगस्त को करीब 300 लोग कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में जुटे, जहां पुलिस ने 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
21 अगस्त : जंतर-मंतर पर बड़ा जमावड़ा
21 अगस्त को ‘Reservation Hatao Andolan’ के बैनर तले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में आरक्षण व्यवस्था के विरोध और उसमें सुधार की मांग वाले पोस्टर-बैनर थे। प्रदर्शनकारियों ने जाति के बजाय आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई।
बाद की रिपोर्टों के अनुसार 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस की कार्रवाई का मुख्य आधार बिना अनुमति प्रदर्शन और निर्धारित प्रतिबंधों का उल्लंघन बताया गया।
22 अगस्त : मांगों को लेकर बहस तेज
21 अगस्त की कार्रवाई के बाद आंदोलन की मांगों को लेकर बहस और तेज हुई। प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग जाति आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक स्थिति को प्रमुख आधार बनाने की मांग कर रहा है। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता और आरक्षण का लाभ सीमित करने, क्रीमी लेयर को प्रभावी बनाने तथा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा जैसी मांगें भी सामने आईं।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे केवल आरक्षण समाप्त करने की मांग नहीं बताते हुए व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी बताया है। हालांकि आंदोलन के नाम और नारों में ‘Reservation Hatao’ प्रमुख बना हुआ है।
23 अगस्त : जंतर-मंतर पर रोक, कनॉट प्लेस में नया प्रदर्शन
23 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों का खंडन किया, जिनमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिलने की बात कही जा रही थी। पुलिस ने बिना अनुमति किसी प्रदर्शन या जमावड़े के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
इसके बावजूद करीब 300 लोग कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग लेकर जुट गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाया और 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।
इसी दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रदर्शन संबंधी सूचनाओं के कारण जंतर-मंतर सहित कुछ अन्य स्थानों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई।
24 अगस्त : आंदोलन पर राजनीतिक बहस भी तेज
24 अगस्त तक आंदोलन का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। आरक्षण समर्थक नेताओं ने इसे संवैधानिक व्यवस्था से जोड़ते हुए आरक्षण समाप्त करने की मांग का विरोध किया है, जबकि आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं।
इस बीच दिल्ली पुलिस का रुख स्पष्ट है कि बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन या भीड़ जुटाने पर कार्रवाई की जाएगी। 21 अगस्त की घटना के बाद पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों के नियमों का पालन कराना रही है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
आंदोलन के दौरान सामने आई प्रमुख मांगों में—
- जाति के बजाय आर्थिक आधार को प्राथमिकता देना।
- आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना।
- आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर के प्रावधान को प्रभावी बनाना।
- मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करना।
- आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों में समान नीति बनाने की मांग।
- कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा UGC Equity Regulations, 2026 में बदलाव की मांग।
- SC/ST Act के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रावधानों की समीक्षा की मांग।
आयोजक और आंदोलन का स्वरूप
‘Reservation Hatao Andolan’ मुख्य रूप से सोशल मीडिया के जरिए संगठित हुआ है। रिपोर्टों में Harsh Dubey का नाम आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में सामने आया है। हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर किसी एक पंजीकृत संस्था को पूरे आंदोलन का आधिकारिक आयोजक घोषित करना अभी उचित नहीं होगा। आंदोलन में विभिन्न युवा समूहों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल दिखाई दिए हैं।
चार दिनों में पुलिस कार्रवाई
21 अगस्त: जंतर-मंतर पर 50 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में।
23 अगस्त: कनॉट प्लेस में करीब 300 लोगों के जमावड़े के बाद 20 से अधिक हिरासत में।
पुलिस की कार्रवाई का प्रमुख आधार अनुमति के बिना प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता रहा है। 21 अगस्त से पहले ही पुलिस ने स्पष्ट कर दिया था कि जंतर-मंतर पर 21 अगस्त के प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।
स्थिति का निष्कर्ष
चार दिनों के घटनाक्रम से स्पष्ट है कि ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ फिलहाल समाप्त नहीं हुआ है। 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी भीड़ और हिरासत की कार्रवाई के बाद 23 अगस्त को प्रदर्शन का स्थान बदलकर कनॉट प्लेस हो गया। आंदोलन अब केवल एक प्रदर्शन तक सीमित न रहकर आरक्षण नीति, आर्थिक आधार, क्रीमी लेयर और UGC के नए इक्विटी नियमों को लेकर व्यापक बहस का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
हालांकि, आंदोलन के आयोजक, प्रतिभागियों की संख्या और इसकी आगे की रणनीति को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। इसलिए आधिकारिक पुलिस आंकड़ों और आयोजकों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा।