आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर वार्ड नंबर 15 में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन

आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर वार्ड नंबर 15 में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन

शिलचर, 7 जनवरी :
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वर्षभर चल रहे कार्यक्रमों की कड़ी में मंगलवार को मध्य शिलचर उपनगर अंतर्गत 15 नंबर वार्ड के लिंक रोड स्थित शुभश्री विवाह भवन में एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ।

सम्मेलन की शुरुआत में 15 नंबर वार्ड की स्थानीय महिलाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत तीन देशभक्ति सामूहिक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। स्वागत भाषण उद्‌घापन समिति के अध्यक्ष असीम पुरकायस्थ ने दिया और मंचासीन अतिथियों सहित सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया।

मुख्य वक्ता के रूप में शिलचर शंकर मठ के अधीक्षक स्वामी विज्ञानानंदजी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है, किंतु वर्तमान समय में इसके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में धर्म की रक्षा के लिए समस्त हिंदू समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा।

शिलचर इस्कॉन के श्रीपाद निमाई गोविंद दास प्रभु ने गीता के श्लोकों का पाठ करते हुए संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित वक्तव्य में हिंदू धर्म के दार्शनिक पक्ष पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्र सेविका समिति की दक्षिण असम प्रांत प्रचारिका सुपर्णा दे ने अपने संबोधन में कहा कि भारतभूमि विश्व कल्याण की भूमि है और हिंदू धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों का सम्मान करता है। उन्होंने आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिए गए “पंच परिवर्तन” के आह्वान की विस्तार से व्याख्या की, जिसमें परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जागरण एवं नागरिक अनुशासन शामिल हैं। साथ ही उन्होंने मातृशक्ति के जागरण पर भी विशेष बल दिया।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय सेवा भारती के दक्षिण असम प्रांत अध्यक्ष शुभ्रांशु शेखर भट्टाचार्य ने कहा कि हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। उन्होंने कहा कि विश्वभर में फैले लगभग 150 करोड़ हिंदुओं को एकजुट करने के उद्देश्य से ही आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर ऐसे हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत विश्वगुरु था और पुनः उस गौरव को प्राप्त करने के लिए सभी हिंदुओं को संगठित होना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू धर्म में आतंकवाद का कोई स्थान नहीं है और हाल ही में अमेरिका द्वारा जारी आतंकवादियों की सूची में एक भी हिंदू का नाम नहीं है। उनके अनुसार, हिंदुत्व एक जीवन पद्धति और संस्कृति है, जो सबको अपनाने की क्षमता रखती है।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वालों में अन्वेषा आचार्य, त्रिपर्णा देव, अनन्या साहा, तापसी आचार्य, अद्रिता चौधुरी एवं अनोखी दास शामिल रहीं। कार्यक्रम के अंतिम चरण में धन्यवाद ज्ञापन त्रिपर्णा देव ने किया। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन जया आचार्य ने किया।

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