काठीघोड़ा विधानसभा क्षेत्र के शालचापड़ा प्रथम खंड में दिन-रात चल रहे ‘दे स्टोन क्रशर’ से परेशान ग्रामीणों ने तत्काल बंद कराने की मांग की
काठीघोड़ा विधानसभा क्षेत्र के शालचापड़ा जीपी अंतर्गत शालचापड़ा प्रथम खंड में आबादी वाले इलाके के बीच संचालित दे स्टोन क्रशर को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर से निकलने वाले तेज शोर और उड़ती पत्थर की धूल के कारण इलाके में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या को लेकर कछार जिला आयुक्त सहित वन विभाग, कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर क्रशर को बंद भी कराया था, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद दोबारा क्रशर चालू कर दिया गया। इससे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रशर दिन-रात लगातार चलने के कारण उत्पन्न तेज और कर्कश आवाज से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि बीमार और बुजुर्ग लोगों को आराम करने में परेशानी हो रही है। वहीं, पत्थर तोड़ने के दौरान उड़ने वाली धूल से आसपास के घरों और वातावरण में प्रदूषण फैल रहा है, जिससे विशेष रूप से बीमार लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी के विरोध में रविवार को स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और क्रशर के संचालन के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस दौरान आबेदा हक चौधरी, सैफुद्दीन लस्कर, आफताबुद्दीन लस्कर, सादिक अहमद लस्कर, हसना बेगम लस्कर, सेपी बेगम लस्कर और रिपन लस्कर सहित अन्य ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की।
ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी कर घनी आबादी वाले क्षेत्र में क्रशर संचालित किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले की तत्काल जांच कराने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्रशर को आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग की।
ग्रामीणों ने कछार जिला प्रशासन, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दे स्टोन क्रशर का संचालन बंद कराने और क्षेत्रवासियों को ध्वनि एवं धूल प्रदूषण से राहत दिलाने की मांग की है।