कुलसचिव का दावा— पूरी प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी, आधिकारिक शिकायत मिलने पर होगी नियमानुसार कार्रवाई; छात्रों को ठगों से सावधान रहने की सलाह
प्रेरणा ब्यूरो, शिलचर, 7 जुलाई : बराक घाटी के एकमात्र केंद्रीय शिक्षण संस्थान असम विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया पर विवादों का साया मंडराने लगा है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने के नाम पर कथित रूप से धन लेनदेन किए जाने के आरोप सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर और छात्र समुदाय में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस पूरे प्रकरण को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।
सार्वजनिक रूप से सामने आए आरोपों के अनुसार, एमए, एमएससी सहित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने के बदले एक सीट के लिए भारी रकम की मांग किए जाने का दावा किया गया है। इस मामले में छात्र युनियन के अध्यक्ष राज किंकर चक्रवर्ती का नाम भी सोशल मीडिया पर आरोपों के साथ सामने आया है। हालांकि अब तक इन आरोपों की किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में जांच पूरी हुई है।
मामले के प्रकाश में आने के बाद विभिन्न वर्गों में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की जा रही है। मांग की जा रही है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून तथा विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में प्रेरणा भारती से बातचीत करते हुए असम विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रदोष किरण नाथ ने कहा कि विश्वविद्यालय को इस विषय में एक ई-मेल प्राप्त हुआ है, किंतु शिकायत भेजने वाले की पहचान स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रचलित नियमों के अनुसार विधिवत एवं आधिकारिक शिकायत प्राप्त होने के बाद ही किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
कुलसचिव ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की संपूर्ण प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित नियमों, मेरिट और पारदर्शी व्यवस्था के तहत संचालित की जा रही है तथा अब तक किसी प्रकार की अनियमितता उनके संज्ञान में नहीं आई है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ अवसरवादी तत्व प्रवेश दिलाने का झांसा देकर छात्रों एवं अभिभावकों से ठगी करने का प्रयास कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे प्रवेश के नाम पर किसी भी व्यक्ति को धनराशि न दें और किसी भी प्रकार के प्रलोभन या झांसे में न आएं। उनका कहना था कि केवल पात्र एवं मेरिट सूची में चयनित अभ्यर्थियों को ही प्रवेश मिलेगा तथा किसी भी अनधिकृत माध्यम से प्रवेश संभव नहीं है।
(अस्वीकरण : इस समाचार में उल्लिखित आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए दावों एवं सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।)