असम में मारवाड़ियों के आगमन और व्यापारिक विस्तार में कोठारी बंधुओं का ऐतिहासिक योगदान

कोठारी महासिंह राय मेघराज : असम में मारवाड़ी व्यापारिक परंपरा के अग्रदूत

– मुरारी केडिया 

असम में मारवाड़ियों के आगमन और उनके व्यापारिक विस्तार के इतिहास में कोठारी बंधुओं का विशेष स्थान रहा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, कोठारी बंधुओं का आगमन लगभग 1818 ई. में तेजपुर तथा 1828 ई. में गुवाहाटी में हुआ था। दोनों स्थानों पर उनके प्रतिष्ठान और आवास ‘बड़ा गोला’ के नाम से प्रसिद्ध थे। गुवाहाटी में उनका ‘बड़ा गोला’ फैंसी बाजार में फल बाजार के निकट स्थित था।

कोठारी बंधुओं ने असम में व्यापारिक गतिविधियों को संगठित रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जाता है कि सेल्स टैक्स विभाग में उनके व्यवसाय का पंजीकरण सबसे पहले हुआ था। उस समय सरकार को कर का भुगतान इम्पीरियल बैंक में CST अकाउंट नंबर 1 के अंतर्गत किया जाता था। यह विवरण असम में उनके व्यापारिक प्रतिष्ठान की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।

गुवाहाटी में पंजीकृत होने वाली पहली मोटरगाड़ियों में भी उनका नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। कहा जाता है कि शहर में सबसे पहले पंजीकृत मोटरगाड़ी का नंबर ASK 1 था और वह कोठारी बंधुओं की ही थी।

व्यापार के क्षेत्र में कोठारी बंधुओं ने असम में नमक और मसूर दाल लाकर इनके कारोबार की शुरुआत की। उनका पहला बजरा असम के मानकाचर में आकर ठहरा था। इसके बाद उन्होंने राज्य के विभिन्न स्थानों पर अपनी व्यापारिक गद्दियां स्थापित कीं। इन प्रतिष्ठानों के माध्यम से उनका कारोबार लगातार विस्तृत होता गया।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वर्ष 1864 ई. तक असम में कोठारी बंधुओं की कुल 64 व्यापारिक गद्दियां स्थापित हो चुकी थीं। यह संख्या उस दौर में उनके व्यापक व्यापारिक नेटवर्क और व्यावसायिक सक्रियता का परिचायक है।

कोठारी बंधुओं की यह यात्रा केवल एक व्यापारिक परिवार के विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि असम में मारवाड़ी समाज के शुरुआती आगमन, व्यापारिक उद्यमशीलता और आर्थिक योगदान के इतिहास का भी महत्वपूर्ण अध्याय है। उनके प्रयासों ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारिक संपर्कों के विस्तार की नींव मजबूत करने में योगदान दिया।

Leave a Comment