डिब्रूगढ़: असम में वर्ष २०१९ से २०२३ के बीच कैंसर के कुल २३,१५७ मामले और कैंसर से संबंधित ७,०७३ मौतें दर्ज की गईं। यह जानकारी असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएमसीएच) में जारी पॉपुलेशन-बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर), डिब्रूगढ़ की पांच वर्षीय रिपोर्ट में सामने आई है।
पॉपुलेशन-बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री, डिब्रूगढ़ द्वारा तैयार की गई इस व्यापक रिपोर्ट में असम की करीब एक-चौथाई आबादी को शामिल किया गया है। अध्ययन के दायरे में डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, शिवसागर, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, माजुली, लखीमपुर और धेमाजी जिले शामिल हैं।
रिपोर्ट का विमोचन एएमसीएच के ऑयल लेक्चर हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में एएमसीएच के प्राचार्य डॉ. संजीब काकोटी ने किया। रजिस्ट्री अध्ययन का नेतृत्व एएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आदित्य शर्मा ने किया। रिपोर्ट को क्षेत्र में कैंसर की रोकथाम, नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय आधार बताया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, कुल मामलों में ११,७८१ मामले (५०.९ प्रतिशत) पुरुषों में और ११,३७६ मामले (४९.१ प्रतिशत) महिलाओं में दर्ज किए गए।
क्षेत्र में कैंसर की घटनाओं में जिलावार काफी अंतर देखा गया। पुरुषों में जोरहाट में उम्र-समायोजित कैंसर घटना दर सबसे अधिक ८६.४ प्रति १ लाख दर्ज की गई, जबकि महिलाओं में डिब्रूगढ़ में यह दर सबसे अधिक ७९.८ प्रति १ लाख रही।
तंबाकू से जुड़े कैंसर अब भी क्षेत्र में स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बने हुए हैं। पुरुषों में दर्ज कैंसर के ६४.५ प्रतिशत मामले और महिलाओं में ३९.९ प्रतिशत मामले तंबाकू से संबंधित कैंसर थे।
पुरुषों में ग्रासनली (ओसोफेगस) का कैंसर सबसे प्रमुख कैंसर के रूप में सामने आया, जो कुल मामलों का ३९.९ प्रतिशत था। इसके बाद फेफड़ों का कैंसर प्रमुख रहा।
महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक पाया गया। यह महिलाओं में दर्ज कैंसर के २३.८ प्रतिशत मामलों और कैंसर से होने वाली २३.५ प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार रहा।रिपोर्ट में बचपन में होने वाले कैंसर पर भी प्रकाश डाला गया है। कुल कैंसर मामलों में बच्चों में होने वाले कैंसर की हिस्सेदारी करीब १.२५ प्रतिशत रही, जिसमें ल्यूकेमिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।रिपोर्ट जारी करने के कार्यक्रम में क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय के शिक्षक और अन्य संबंधित पक्ष मौजूद थे। रिपोर्ट से ऊपरी असम में कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपचार संबंधी रणनीतियों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रमाण-आधार उपलब्ध होने की उम्मीद है।
अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़