असम उड़िया महासभा ने उड़िया भाषा में चाय बहुल क्षेत्र में शिक्षा प्रदान हेतु मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन।

दुमदुमा प्रेरणा भारती 24 फरवरी  : असम उड़िया महासभा का 14वां स्थापना दिवस असम उड़िया महासभा के दुमदुमा समिति के सौजन्य तथा तारा-बदलाबेटा चाय बगान  के प्राथमिक समिति की मेजबानी और वृहत्तर दुमदुमा अंचल के श्रद्धालु लोगों  के सहयोग से दुमदुमा तारा चाय बागान के स्टाफ खेल मैदान में मनाया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित खुली सभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को रूपायन करने हेतु मुख्यमंत्री को आज स्मार पत्र दुमदुमा सम जिला आयुक्त के मार्फत प्रेषित किया।
असम उड़िया महासभा के दुमदुमा समिति के सभापति दीपक तांती,सचिव टुमन तांती आयोजन समिति के सचिव मदन नायक के हस्ताक्षरित स्मारक पत्र मे गुवाहाटी और जोरहाट से प्रकाशित असमिया अखबार के 17 जनवरी 2025 के अंक में प्रकाशित समग्र शिक्षा मिशन के लैंग्वेज एंड लर्निंग फेडरेशन पत्र राज्य के चाय बागान इलाकों के स्कूल में सादरी असमिया में शिक्षा दान के लिए शिक्षार्थी शिक्षक की सूची  संग्रह करके शिखा अधिकारी रूपरेखा तैयार करने के लिए तीन चरणों में कार्यशालाएं आयोजित किए जाने का समाचार से काफी उत्साहित है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में असम सरकार ने असम के विभिन्न जातीय समूहों के लोगों की भाषाओं और संस्कृतियों को संरक्षण और संवर्धन करने के लिए  प्रयास किए हैं। असम की जातीय भाषाओं के उत्थान के लिए क्षेत्र की जातीय भाषाओं में शिक्षा के प्रावधान का उल्लेख किया। हालाँकि,  पहले भी  यह घोषणा की गई थी कि चाय बागान क्षेत्रों में चाय जनगोष्ठी  भाषाओं में भी शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसलिए, असम के लोगों की भाषाओं के विकास में सभी जातीय समूहों की भाषाओं के महत्व को समझना महत्वपूर्ण है। यह निश्चित रूप से आशा का संदेश है।इस संदर्भ में, यह कहा जा सकता है कि बड़े चाय जनगोष्ठी समूह के अन्य जनजातीय लोगों के बीच उड़िया एक और सबसे बड़ा जातीय समूह है। चाय उद्योग में लगभग 40 लाख उड़िया लोग शामिल हैं। यह सर्वविदित है कि उड़िया भारत की अन्य भाषाओं की तरह एक मान्यता प्राप्त ध्रुपदी भाषा है।
इसलिए, असम उड़िया महासभा को लगता है कि अगर असम सरकार चाय जनगोष्ठी के भाषा समूह के साथ चाय जनगोष्ठी के उड़िया भाषा को अंतर्भूक्त सहित उड़िया भाषा के उत्थान के लिए उचित कदम उठाती है, तो असम के उड़िया लोग हमेशा असम सरकार के आभारी रहेंगे।

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