गुमड़ा पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए दो आरोपियों के बयान से उठे गंभीर सवाल
शिलचर, 17 सितंबर। काठीघोड़ा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में कथित तौर पर आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों को ‘मैनेज’ कर वर्षों से अवैध शराब का कारोबार चलाए जाने का आरोप सामने आया है। गुमड़ा पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए दो कथित शराब कारोबारियों के बयानों के बाद यह मामला चर्चा में है।
स्थानीय लोगों की शिकायत के आधार पर गुमड़ा पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 10 सितंबर को जलालपुर क्षेत्र में छापेमारी की थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त करने के साथ बप्पाजीत दे और जय कुमार वैष्णव को कथित तौर पर अवैध शराब बेचने के आरोप में हिरासत में लिया गया।
पुलिस की पूछताछ के दौरान दोनों ने कथित तौर पर ग्वाला उपनाम वाले एक व्यक्ति का नाम लिया। बाद में पत्रकारों से बातचीत में बप्पाजीत दे ने दावा किया कि वह करीब छह-सात वर्षों से अवैध शराब के कारोबार से जुड़ा था। उसके अनुसार, कारोबार शुरू करने के बाद दिवाकर ग्वाला नामक आबकारी विभाग के एक कर्मचारी द्वारा कथित रूप से शराब कारोबारियों से हर महीने पैसे एकत्र किए जाते थे।
बप्पाजीत दे के अनुसार, कुछ महीनों तक सीधे पैसे लेने के बाद कथित तौर पर उन्हें निर्देश दिया गया कि पैसे सीधे देने के बजाय कालाइन क्षेत्र की किसी वाइन शॉप में जमा कराए जाएं। उसके दावे के मुताबिक, बाद में आबकारी विभाग के कर्मचारी वहां से रकम ले जाते थे। उसने यह भी दावा किया कि पिछले चार-पांच वर्षों से अलग-अलग वाइन शॉप में इसी तरीके से पैसे जमा कराए जाते रहे।
हालांकि, उसने यह स्पष्ट किया कि संबंधित वाइन शॉप से पैसे आखिर कौन ले जाता था, इसकी उसे जानकारी नहीं थी। उसके अनुसार, उनका काम केवल दिए गए निर्देश के अनुसार रकम जमा करना था। दूसरे हिरासत में लिए गए व्यक्ति जय कुमार वैष्णव ने भी पत्रकारों के समक्ष इसी तरह के आरोपों की पुष्टि करने का दावा किया।
जांच से खुलेगा पूरा मामला
इन आरोपों के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं—क्या वास्तव में आबकारी विभाग के किसी कर्मचारी की मिलीभगत से वर्षों तक अवैध शराब का कारोबार चलता रहा? कथित नेटवर्क का विस्तार किन-किन इलाकों तक है? किन वाइन शॉप में रकम जमा कराने के निर्देश दिए जाते थे और अंततः वह पैसा किसके पास पहुंचता था?
फिलहाल ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित आबकारी कर्मचारी या विभाग का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। गुमड़ा पुलिस की कार्रवाई के बाद अब आरोपों की जांच में सच्चाई कितनी सामने आती है, इस पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।