असम विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा 30 दिसंबर 2025 के दौरान राजभाषा हिंदी एवं तिमाही प्रगति रिपोर्ट पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के विभागों, अनुभागों, प्रकोष्ठों, केंद्रो के निजी सचिवों, अवर श्रेणी लिपिकों, प्रवर श्रेणी लिपिकों, कार्यालय सहायकों आदि के लिए किया गया । कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रभारी प्रोफेसर अशोक सेन एवं प्रोफेसर मनोज कुमार सिन्हा, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग से उपस्थित रहे । इस एक दिवसीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि श्री सुनील गुप्ता, प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सिलचर से थे । माननीय प्रो. सेन ने राजभाषा हिंदी को देश की एकता से जोड़कर जनसंचार की भाषा के रूप में ग्रहण करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि आज के समय में तकनीक के प्रयोग से हिंदी का प्रयोग सहज एवं सरल हो गया है। प्रोफेसर एम.के. सिन्हा ने कार्यशाला के दौरान विभाग अध्यक्ष एवं संकायाध्यक्षों के लिए राजभाषा नियम एवं अधिनियम पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजन का भी प्रस्ताव रखा।
कार्यशाला के दौरान प्रथम सत्र में प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय, श्री सुनील गुप्ता जी ने पावरप्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से राजभाषा अधिनियम व राजभाषा नियम से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने क,ख व ग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजयों की जानकारी दी साथ ही तिमाही प्रगति रिपोर्ट आदि का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों की समस्याओं को सुना तथा उसका निराकरण किया। उन्हें राजभाषा नियम 1963 की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले 14 दस्तावेजों का भी वर्णन किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को नियम 10(4) के तहत विश्वविद्यालय को अधिसूचित करने संबंधित विवरण देते हुए कार्यशाला के लक्ष्य का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
द्वितीय सत्र का संचालन डॉ. सुरेंद्र कुमार उपाध्याय, राजभाषा अधिकारी ने किया । उन्होंने सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को तिमाही प्रगति रिपोर्ट भरने का अभ्यास करवाया । साथ ही प्रशिक्षणार्थियों की समस्याओं को समझा । उन्हें विशिष्ट बिंदुओं पर सुझाव दिए तथा आगे तिमाही रिपोर्ट किस प्रकार भर के देना है इस विषय पर जानकारी दी। कार्यशाला के दौरान द्वितीय सत्र में श्री पृथ्वीराज ग्वाला, अनुवाद अधिकारी एवं श्रीमती मिली रानी पाल,हिंदी अनुवादिका ने भी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मिली रानी पाल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन पृथ्वीराज ग्वाला ने दिया।कार्यशाला के सफल आयोजन में संतोष ग्वाला, हिंदी टंकक का विशेष योगदान था।