ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि पिछले एक दशक में राज्य ने आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) करीब १४९ प्रतिशत बढ़ा है, जबकि सालाना सड़क निर्माण की गति छह गुना बढ़ी है।
राज्य विधानसभा के विशेष सत्र के समापन दिवस पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में संबोधित करते हुए खांडू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश का जीएसडीपी वर्ष २०१६ में करीब २०,३७३ करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर ५०,६५१ करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसी अवधि में राज्य का बजट २३८ प्रतिशत से अधिक बढ़ा है, जबकि प्रति व्यक्ति आय दोगुने से अधिक हो गई है। राज्य के अपने संसाधनों में भी साढ़े पांच गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क संपर्क में भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। जहां पहले राज्य में सालाना करीब ३०० किलोमीटर सड़क का निर्माण होता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब १,८०० किलोमीटर हो गया है। ग्रामीण सड़क नेटवर्क ४,१३१ किलोमीटर से बढ़कर करीब १४,००० किलोमीटर हो गया है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क १,०४३ किलोमीटर से बढ़कर २,५३८ किलोमीटर तक पहुंच गया है। इसके अलावा करीब ४,०६० किलोमीटर सड़कें विभिन्न निर्माण चरणों में हैं।
खांडू ने कहा कि बेहतर सड़कें, सुरंगें, रेल संपर्क, हवाई सेवाएं और डिजिटल बुनियादी ढांचा राज्य के लोगों के बीच दूरियां कम कर रहे हैं और नए आर्थिक अवसर खोल रहे हैं। उन्होंने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे, सेला सुरंग, डोनी पोलो हवाई अड्डे, उन्नत लैंडिंग ग्राउंड और फ्रंटियर हाईवे जैसी प्रमुख परियोजनाओं को राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत, पर्यटन, कृषि और बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनसे रोजगार और आर्थिक विकास को गति मिल सकती है। उन्होंने जोर दिया कि विकास की प्रक्रिया प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़नी चाहिए, क्योंकि राज्य के जंगल, नदियां और पहाड़ उसकी पहचान और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के साथ राज्य की जनजातीय और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा भी जरूरी है। सरकार की ‘विकास, सेवा और विरासत’ की दृष्टि के तहत आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और स्वदेशी विरासत के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
खांडू ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के २१ उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल चुका है। इससे पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलने के साथ-साथ आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल, उद्यमिता, नवाचार, रचनात्मक उद्योग और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्रों में अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया।