अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ३० मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शैक्षणिक सत्र २०२४-२५ के लिए राज्य स्तर के ३० मेधावी विद्यार्थियों को ईटानगर में आयोजित गोल्डन जुबली मेधावी विद्यार्थी पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया।

कक्षा ३ से १२वीं तक के विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में अब तक करीब ८४० विद्यार्थियों को यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है।

विद्यार्थियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री खांडू ने उनकी सफलता में माता-पिता, परिवार, शिक्षकों और मित्रों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासित, एकाग्र और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के भविष्य को आकार देने में इन विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

गोल्डन जुबली मेधावी विद्यार्थी पुरस्कार की शुरुआत २०२२ में अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलने के ५० वर्ष पूरे होने के अवसर पर की गई थी। इसका क्रियान्वयन शैक्षणिक सत्र २०२३-२४ से शुरू हुआ। शैक्षणिक सत्र २०२४-२५ का समारोह दूसरा राज्य स्तरीय आयोजन है। वहीं, २०२५-२६ का राज्य स्तरीय समारोह भी इसी वर्ष आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

शिक्षा सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) २०२० और मिशन शिक्षित अरुणाचल के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार के लिए काम कर रही है। इन पहलों के लक्ष्यों को २०२९ तक हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि एनईपी के क्रियान्वयन के लिए एक कार्यबल का गठन किया गया था। इसके बाद समुदाय आधारित संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया। जिला स्तर पर आयोजित परामर्श बैठकों में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी के बाद एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई।

खांडू ने कहा कि सरकार विद्यालयों का युक्तिकरण करने के साथ-साथ अंतर-ग्राम विद्यालय मॉडल को मजबूत कर रही है। इसके तहत विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों, विशेषकर विषय शिक्षकों की उपलब्धता पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से विषय शिक्षकों की पर्याप्त भर्ती पहले ही की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने सरकारी विद्यालयों में हाल में बढ़े नामांकन का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि देशभर में सरकारी विद्यालयों में घटता नामांकन एक चुनौती बना हुआ है, ऐसे समय में अरुणाचल प्रदेश में नामांकन में वृद्धि उत्साहजनक है।

उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तिगत विकास के बीच संतुलन बनाए रखने का आग्रह किया। खांडू ने अनुशासन, बुजुर्गों और शिक्षकों के प्रति सम्मान, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा शारीरिक फिटनेस के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों से अरुणाचल प्रदेश की जनजातीय परंपरा को बनाए रखने का भी आह्वान किया, जिसमें माता-पिता, बुजुर्गों, शिक्षकों और विद्यालय समुदाय के सदस्यों के प्रति सम्मान को विशेष महत्व दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में खेलों को भी पढ़ाई के समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में खेल मैदान उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी सेवा, निजी क्षेत्र, उद्यमिता, स्टार्टअप और उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध विभिन्न करियर अवसरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड, एपीपीएससी, यूपीएससी तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों को रोजगार और पेशेवर विकास के महत्वपूर्ण माध्यम बताया। साथ ही युवाओं को उद्यमिता और व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अरुणाचली युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने के अवसर भी तैयार कर रही है। उन्होंने भारत सरकार के सहयोग से पासीघाट में राज्य के पहले सैनिक स्कूल की स्थापना का उल्लेख किया। इसके अलावा पीपीपी मॉडल के तहत तवांग में दूसरे सैनिक स्कूल की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार सेना के साथ मिलकर एक व्यवस्थित कोचिंग व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है, जिसके माध्यम से चयनित अरुणाचली विद्यार्थियों को एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की विशेष तैयारी कराई जाएगी। इसका उद्देश्य युवाओं को थल सेना, नौसेना, वायु सेना तथा सशस्त्र केंद्रीय पुलिस बलों में अधिकारी के रूप में करियर बनाने में सहायता देना है। इनमें एसएसबी, आईटीबीपी, सीआरपीएफ और बीएसएफ शामिल हैं।

विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए खांडू ने कहा कि विश्व की शीर्ष १५० विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को राज्य सरकार सहायता प्रदान कर रही है। क्यूएस रैंकिंग के आधार पर संचालित यह छात्रवृत्ति योजना १२वीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि इस पहल से कई अरुणाचली विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं और इस वर्ष करीब १३-१४ विद्यार्थियों को इसका अवसर मिला है।

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि वह स्वयं सरकारी विद्यालय व्यवस्था से पढ़े हैं और सरकारी विद्यालयों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझते हैं। उन्होंने तवांग के गवर्नमेंट गोम्पा मिडिल स्कूल में पढ़ाई करने का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यालय के माध्यमिक स्तर तक उन्नयन के बाद वह उसके पहले बैच के विद्यार्थियों में शामिल थे।

समारोह में शिक्षा मंत्री पी. डी. सोना, शिक्षा मंत्री के सलाहकार मुत्चु मिथी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।

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