अरुणाचल की वनस्पति संपदा के संरक्षण के लिए राज्यपाल ने दिए व्यापक प्रयासों के निर्देश

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) ने राज्य की समृद्ध वनस्पति एवं जैव विविधता के संरक्षण के लिए विकास गतिविधियों के साथ-साथ वैज्ञानिक और दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने राज्य की असाधारण वनस्पति संपदा को वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, टिकाऊ आजीविका और दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुरक्षा के माध्यम से संरक्षित करने की आवश्यकता बताई।

राज्यपाल ने यह बात भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के निदेशक डॉ. कनाड दास के साथ लोक भवन, ईटानगर में हुई बैठक के दौरान कही। बैठक में अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध पादप विविधता, मौजूदा संरक्षण पहलों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

राज्यपाल ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में पांच हजार से अधिक पुष्पीय पौधों की प्रजातियां, करीब छह सौ ऑर्किड प्रजातियां, पचहत्तर से अधिक रोडोडेंड्रॉन प्रजातियां तथा सैकड़ों औषधीय पौधे पाए जाते हैं। उन्होंने राज्य के दूरदराज और अब तक कम अन्वेषित क्षेत्रों में व्यापक वनस्पति सर्वेक्षण कराने तथा व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और शोध के लिए अधिक वैज्ञानिक कर्मियों की तैनाती का सुझाव दिया।

राज्यपाल ने दुर्लभ, संकटग्रस्त और विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियों के लिए एक समर्पित आरईटी प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता बताई। इसके तहत जीआईएस मैपिंग, प्रजातियों की संख्या की निगरानी, बीज बैंक और प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन जैसे उपाय किए जाने का सुझाव दिया गया।

अरुणाचल प्रदेश को भारत का ‘ऑर्किड पैराडाइज’ बताते हुए राज्यपाल ने समर्पित वनस्पति उद्यान स्थापित करने, सामुदायिक ऑर्किड संरक्षण क्षेत्रों का विकास करने तथा टिश्यू कल्चर और ऑर्किड रेस्क्यू कार्यक्रमों के माध्यम से संरक्षण के प्रयासों का विस्तार करने की बात कही। राज्य में देश की लगभग चालीस प्रतिशत ऑर्किड विविधता पाई जाती है।

उन्होंने भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण को डिजिटल फ्लोरा एवं जलवायु परिवर्तन निगरानी नेटवर्क विकसित करने की सलाह भी दी, जिसमें वास्तविक समय का फ्लोरा डेटाबेस और पारिस्थितिक निगरानी प्रणाली शामिल हो। राज्यपाल ने संरक्षण अभियानों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और जन-जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बैठक में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिक प्रभारी डॉ. कृष्णा चौलू भी उपस्थित थे।

Leave a Comment