अंबिकापट्टी के ऐतिहासिक शनि एवं काली मंदिर के पास कचरे का अंबार, समिति ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

अंबिकापट्टी के ऐतिहासिक शनि एवं काली मंदिर के पास कचरे का अंबार, समिति ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

शिलचर, 11 जून। शहर के अंबिकापट्टी कॉलेज रोड प्वाइंट स्थित ऐतिहासिक श्रीश्री शनि मंदिर एवं काली मंदिर के आसपास पिछले कई दिनों से लगातार कचरा, मछलियों के खाली बॉक्स तथा मृत पशुओं के अवशेष फेंके जाने से क्षेत्र में गंभीर अस्वच्छता और दुर्गंध की समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों तथा राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर परिसर के निकट लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से कुछ असामाजिक तत्व कैमरों पर पॉलीथिन ढक देते हैं, ताकि कचरा फेंकने वाले लोगों की पहचान न हो सके। इस कारण दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष केशव चंद्र पाल एवं सचिव अशोक साहा ने बताया कि यह मंदिर पिछले 47 वर्षों से क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। किंतु कुछ दिनों से कुछ अज्ञात और धर्मविरोधी मानसिकता वाले लोग मंदिर परिसर के समीप कचरा फेंककर न केवल वातावरण को दूषित कर रहे हैं, बल्कि मंदिर की पवित्रता को भी आघात पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस अव्यवस्था के कारण क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं। समिति का कहना है कि यदि शीघ्र ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मंदिर प्रबंधन समिति ने समाचार माध्यमों के जरिए शिलचर नगर निगम तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल कचरे की सफाई, नियमित निगरानी और सीसीटीवी कैमरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। समिति के सदस्यों का आरोप है कि कैमरों को बार-बार क्षतिग्रस्त अथवा ढक दिए जाने से असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़ रहे हैं।
समिति ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा मंदिर परिसर की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने के लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। इससे न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बनी रहेगी, बल्कि क्षेत्र का धार्मिक एवं सामाजिक वातावरण भी सुरक्षित रहेगा।

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