शब्दवीणा के राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में प्रकृति एवं पर्यावरण पर पढ़ी गयीं शानदार रचनाएँ
शब्दवीणा की 15 प्रदेश समितियों के गणमान्य रचनाकारों ने पर्यावरण संरक्षण पर प्रकट किये भावोद्गार “-किसी के शाप से, ये वृक्ष बने गये वरना। ये देवता हैं, जो हालात के सताये हैं।” -संकट में है धरती अपनी, आओ पर्यावरण संवारें पर्यावरण बचाने भू पर, आ जाओ अब कृष्ण कन्हैया -गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक-सह-सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ … Read more