उधर उर्वशी व्यस्त हुई है
परिवर्तन ऐसा आया है, रहन सहन सब भव्य हो गए। भोलापन हो गया नदारद, कहने को हम सभ्य हो गए।। नर-नारी में होड़ लगी है, किससे आगे कौन रहेगा। कोई नहीं बताने वाला, अपने घर की कौन कहेगा।। परिधि पार कर चुकी लाज की, नारी की गर्दन ऊँची है। नर का नाम शिखर पर टंकित, … Read more