शब्दवीणा की साहित्यिक परिचर्चा “एक शाम, साहित्य के नाम” में ग़ज़ल की बारीकियों पर हुई बातचीत
शब्दवीणा की साहित्यिक परिचर्चा “एक शाम, साहित्य के नाम” में ग़ज़ल की बारीकियों पर हुई बातचीत* *वरिष्ठ साहित्यकार अजय ‘अज्ञात’ से वार्ताकार जीतेंद्र सिंघल ने पूछे अनेक साहित्यिक प्रश्न* *”-कल्पना ज़रूरी है, भावना ज़रूरी है। शायरी में शायर की आत्मा ज़रूरी है।”* *”-सीखना अगर चाहो जीने का सलीका तुम। पास में बुजुर्गों के बैठना ज़रूरी … Read more