बढ़ती संस्था एवं निष्क्रिय संस्था दोनों ही समाज पर बोझ – मदन सुमित्रा सिंघल
जब जब कोई संस्था निष्क्रिय होती है तब तब समाज में बगावत के सुर उबरना, मौन विरोध, सपष्ट विरोध एवं षड्यंत्र के साथ विरोध होना स्वाभाविक है। ऐसा समाज में होना घातक होने के बावजूद लोगों में जागरुकता आती है। ऐसे भी लोग होते हैं जो चंदा भी देते हैं, समाज के निमंत्रण पर ऐन … Read more