थोड़ी आँच बची रहने दो थोड़ा धुआँ निकलने दो
मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे इस बूढ़े पीपल की छाया में सुस्ताने आएँगे हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेड़ो मत हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आएँगे थोड़ी आँच बची रहने दो थोड़ा धुआँ निकलने दो तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफ़िर आएँगे उनको क्या मालूम निरूपित इस सिकता पर क्या बीती … Read more