कन्यादान शास्त्रों द्वारा प्रदत्त नाम है जो हिंदुओं में काफी प्रचलित है।
किसी भी मनुष्य का दान करने एवं ऐसा दान लेने का अधिकार किसी के पास नहीं है। मनुष्य कोई वस्तु नहीं है जो दान किया जा सकें। लेकिन कन्या दान सबसे पहले प्रजापति दक्ष ने किया था। इसका सपष्ट तात्पर्य है कि पिता अपनी बेटी को ऐसे युवक के सुरक्षित हाथों में सौंपकर अपने सर्वाधिकार … Read more