अपनों के बिना
जो कह दिया वह *शब्द* थे ; जो नहीं कह सके वो *अनुभूति* थी ।। और, जो कहना है मगर ; कह नहीं सकते, वो *मर्यादा* है ।। *जिंदगी* का क्या है ? आ कर *नहाया*, और, *नहाकर* चल दिए ।। *बात पर गौर करना*- —- *पत्तों* सी होती है कई *रिश्तों की उम्र*, आज … Read more