25 अप्रैल/इतिहास-स्मृति पचपदरा का नमक आंदोलन

गांधी जी द्वारा 1930 में किया गया नमक सत्याग्रह बहुत प्रसिद्ध है; पर इसका आधार 1926 में हुआ पचपदरा (राजस्थान) का नमक आंदोलन था। भारत में समुद्र के किनारे अनेक स्थानों पर नमक बनता है। सौ वर्ष पूर्व तक मारवाड़ में 90 स्थानों पर नमक बनता था। सम्पूर्ण उत्तर भारत में राजस्थान का नमक ही … Read more

… चिनगारी का खेल बुरा होता है ! — सुनील कुमार महला

हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले में विदेशी नागरिकों समेत 26 की मौत हो गई, और मरने वालों में अधिकांश पुरुष हैं। वास्तव में यह बहुत ही दुखद व अति निंदनीय घटना है।यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब करीब सवा दो महीने बाद अमरनाथ यात्रा होनी है।कहना ग़लत नहीं होगा कि इससे आतंक का घिनौना … Read more

मुर्शिदाबाद में वर्तमान हालात को लेकर राजनीतिक दलों की भूमिका मानो एक पहले से रची हुई नाटक हो—” राजू दास

“सब अभिनय में व्यस्त हैं, इधर हिंदू हो रहे हैं बेघर।” मुर्शिदाबाद कभी नवाबी राजधानी हुआ करता था। आज भी इस ज़िले की धरती पर इतिहास चलता है। लेकिन आज इतिहास बनाने की राह में इंसान नहीं—राजनीति मुख्य कारण बनती जा रही है। एक छोटी सी उकसावे की घटना से पूरा ज़िला, यहाँ तक कि … Read more

पहलगाम हिन्दू नरसंहार पर संयम अब बईमानी मोदी कायर नहीं, कायर आतंकियों के आका हैं — आचार्य श्रीहरि

कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों के हाथों बलिदान हुए निर्दोष लोगों के प्रति आतंकियों के समर्थकों की सहानुभूति हो ही नहीं सकती है, ये हिंसक लोग है, ये विभत्स लोग हैं, ये मानवता विरोधी हैं, ये शांति के दुश्मन हैं, ये आधुनिक युग के रक्तपिशाचुओं के प्रतीक हैं, ये खून बहाकर, हत्या कर खुश होने … Read more

बोझ से कराहते पहाड़ों को चाहिए राहत का मलहम !! – संजीव शर्मा

बढ़ती भीड़ से पहाड़ कराह रहे हैं और वाहनों की बेतहाशा संख्या उनका कलेजा छलनी कर रही है। फिर भी पर्यटक बेफिक्र हैं और पहाड़ों के पहरेदार यानि प्रशासन निश्चिंत । पहाड़ लगातार इशारा कर रहे हैं, खुलेआम संकेत दे रहे हैं और कई बार सीधी चेतावनी भी, फिर भी वीकेंड पर शिमला से लेकर … Read more

23 अप्रैल/जन्म-दिवस विद्वत्ता की प्रतिमूर्ति पण्डिता रमाबाई

रमाबाई का जन्म 23 अप्रैल, 1858 को ग्राम गंगामूल (जिला मंगलोर, कर्नाटक) में हुआ था। उस समय वहाँ लड़कियांे की उच्च शिक्षा को ठीक नहीं माना जाता था। बाल एवं अनमेल विवाह प्रचलित थे। रमा के विधुर पिता का नौ वर्षीय बालिका से पुनर्विवाह हुआ। उससे ही एक पुत्र एवं दो पुत्रियाँ हुईं। रमा के … Read more

22 अप्रैल/पुण्य-तिथि क्रान्ति और सेवा के राही योगेश चन्द्र चटर्जी

क्रान्तिवीर योगेश चन्द्र चटर्जी का जीवन देश को विदेशी दासता से मुक्त कराने की गौरवमय गाथा है। उनका जन्म अखंड भारत के ढाका जिले के ग्राम गोकाडिया, थाना लोहागंज में तथा लालन-पालन और शिक्षा कोमिल्ला में हुई। 1905 में बंग-भंग से जो आन्दोलन शुरू हुआ, योगेश दा उसमें जुड़ गये। पुलिन दा ने जब ‘अनुशीलन … Read more

गणपतराय का बलिदान

गणपतराय का जन्म 17 जनवरी, 1808 को ग्राम भौरो (जिला लोहरदगा, झारखंड) में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री किसनराय तथा माता श्रीमती सुमित्रादेवी थीं। बचपन से ही वनों में घूमना, घुड़सवारी, आखेट आदि उनकी रुचि के विषय थे। इस कारण उनके मित्र उन्हें ‘सेनापति’ कहते थे। बचपन से ही इनका मन … Read more

कभी-कभी ऐसे ही

कभी-कभी दिल के अंदर आग जलती है। इस आग का स्रोत पता नहीं चलता। इस आग की शुरुआत और अंत का पता नहीं चलता। बस इतना पता चलता है कि इस आग के प्रभाव से जले हुए इंसान, जैसे एक सिगरेट की तरह, अनंत काल तक धुंआ करते रहते हैं। एक दिन इस आग के … Read more

कवि सम्मेलन बनाम फूहड़पन व चुटकुलेबाज़ी– सीताराम गुप्ता

कवि सम्मेलन बनाम फूहड़पन व चुटकुलेबाज़ीतालियाँ पीटना और पिटवाना ये दोनों ही बातें तथाकथित कवि-सम्मेलनों के लिए ज़रूरी मानी जाती हैं। और ये हास्य कवि-सम्मेलन और हास्य कवि? ये भी अनोखे जीव होते हैं। हँसते-हँसाते न जाने कब गंभीर हो जाएँ और न जाने कब कूदकर राष्ट्रप्रेम की ट्रेन पर सवार हो जाएँ और कब … Read more