नाचोनी नाचन लागी
कोयल कुहूक रही,तन को सुलगाई रही, केतेकी की खुशबू तो मस्ती बढ़ाई रही, खोपे में ‘कपोऊ’ लगा,बेचैनी बढ़ाई रही, कमरिया टूट रही,बलखाई के मचल रही. भाई बोहाग आई गवा, बिहू आई गवा, ढो़ल पेंपा बाजन लागे,नाचोनी नाचन लागी. ढ़ोलक की थाप पर,टोलीयां मचल रही, बिहू के गान पर,’होरु हजाई’ सजी रहा. पहिन के रेशमी कुर्ता, … Read more